सच्चा महामानव वही, जो दूसरों की खुशी में अपनी खुशी तलाशे

जिनका चित्त अत्यंत प्रशांत है, जो सबके प्रति कोमल भाव रखते हैं, जिन्होंने स्वेच्छा से अपनी भावनाओं पर नियंत्रण करना सीख लिया है, जो न मन से, न वचन से और न ही कर्म से अर्थात जो किसी भी रीति से दूसरों को हानि नहीं पहुँचाते, दूसरों का किंचित भी अहित नहीं करते।
जिनका मन दया से द्रवीभूत रहता है, जो चोरी और हिंसा से सदा दूर रहते हैं, जो अच्छे गुणों को ग्रहण करने तथा दूसरों के कार्य साधन में प्रसन्नता पूर्वक सहायक की भूमिका का निर्वहन करने को तत्पर रहते हैं। सदाचार से जिनका जीवन सदा उज्ज्वल और ...
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