सच्ची मनुष्यता वही, जहां द्वेष नहीं दया और हर प्राणी के प्रति सम्मान हो
जिस व्यक्ति ने किसी से द्वेष नहीं किया, दीन-दुखियों पर दया करना जिनका स्वभाव है, जो सदा पर-हित साधन की विशेष कामना रखते हैं, ऐसे मनुष्य ही वास्तव में मनुष्यता की परिभाषा में खरे उतरते हैं। उन्हें ही मनुष्य कहलाने का अधिकार प्राप्त हो सकता है।
जो सदा प्रिय वचन बोलते हैं, प्रत्येक प्राणी में समत्व और अपनत्व भाव के दर्शन करते हैं, वे निश्चय ही ईश्वर के सच्चे भक्त हैं। भक्ति कर्मकांड से प्राप्त नहीं होती, वह तो सदव्यवहार और विनम्रतापूर्वक प्राणी मात्र की सेवा से प्राप्त होती है। समस्त प्राणी ईश्वरीय रचना हैं। सभी प्राणियों में उस परम ...
📡 स्रोत: NewsData.io