'सदस्यता नहीं जाएगी, जिसे जहां जाना है जाएं...':ब्रजवासी-राहुल पर BJP के मंत्रियों को इतना भरोसा क्यों, कानून क्या कहता है
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निर्दलीय MLC बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज 31 अक्टूबर को भाजपा में शामिल हो गए। यह खबर जैसे ही बाहर आई लोगों ने कायदे-कानून का हवाला देकर उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की। इसके तुरंत बाद ब्रजवासी पलट गए। उन्होंने पार्टी में शामिल होने की जगह सिर्फ समर्थन देने की बातें कही। इसके बाद सवाल उठने लगा है कि बिहार में कानून का राज (रूल ऑफ लॉ) है या कानून/BJP द्वारा शासन (रूल बाय लॉ/BJP)?
पूरा मामला क्या है, क्यों कहा जा रहा कि बिहार में कानून का राज नहीं, रूल बाय BJP है; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में…। सबसे पहले ब्रजवासी और राहुल राज का पूरा मामला समझिए… बंशीधर ब्रजवासी ने तिरहुत स्नातक सीट से JDU प्रत्याशी अभिषेक झा और राहुल राज ने सारण शिक्षक सीट से JDU प्रत्याशी आनंद पुष्कर को चुनाव हराया है।
दोनों निर्दलीय MLC चुने गए हैं। 27-28 अक्टूबर को आए MLC चुनाव के रिजल्ट के 3 दिन बाद 31 अक्टूबर की शाम दोनों पटना स्थित भाजपा कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, बिहार BJP प्रभारी हरीश द्विवेदी और बिहार BJP अध्यक्ष संजय सारवगी की उपस्थिति में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
इसके फोटो और वीडियो सामने आए। एक फोटो में राहुल राज और ब्रजवासी दोनों भाजपा की सदस्यता वाली पर्ची दिखाते नजर आए। 31 अक्टूबर की शाम पत्रकारों से बातचीत में ब्रजवासी ने साफ कहा, ‘जी बिल्कुल हमने BJP की सदस्यता ली है। शिक्षकों के हित में हमने यह फैसला लिया है। हमारे मुद्दों पर मुख्यमंत्री सम्राट ने आश्वासन दिया है।
इसके बाद हमने सदस्यता ली है। अकेले रहकर हम कुछ नहीं कर सकते थे।’ विवाद बढ़ने पर 31 अक्टूबर की देर रात ब्रजवासी पलट गए। उन्होंने कहा, ‘हमने BJP की सदस्यता नहीं ली है। हमने NDA को समर्थन देने का ऐलान किया है। सरकार ने हमारी मांगों का समर्थन किया है।’ वहीं, डॉ.
राहुल राज ने अब तक कोई बयान नहीं दिया है। बिहार में ‘कानून का राज’ नहीं, रूल बाय BJP के 4 संकेत... 1.
दो निर्दलीय विधान पार्षदों को भाजपा में शामिल कराना संविधान में स्पष्ट उल्लेख के बावजूद निर्दलीय MLC को भाजपा ने कथित तौर पर पार्टी में शामिल करवाया। जबकि, संविधान की 10वीं अनुसूची दल-बदल विरोधी कानून के पैराग्राफ 2(2) में निर्दलीय सदस्यों के संबंध में स्पष्ट लिखा गया है...
लीगल एक्सपर्ट का साफ मानना है कि अगर विधान पर
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar