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सागर की रामरती लोधी बनीं 'लखपति दीदी', छोटे कारोबार से लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 6 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
सागर की रामरती लोधी बनीं 'लखपति दीदी', छोटे कारोबार से लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर बदली परिवार की आर्थिक स्थिति;

स्व-सहायता समूह से प्रशिक्षण और ऋण लेकर खोलीं कई दुकानें, अब सालाना एक लाख रुपये से अधिक की शुद्ध आय।

सागर, नवंबर 06: राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सागर जिले के परसोरिया गांव की रामरती लोधी ने अपनी मेहनत, लगन और उद्यमशीलता से आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। कभी परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। उनके पति की छोटी-सी चाय की दुकान से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था।

ऐसे में रामरती ने राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जय माता दी स्व-सहायता समूह से जुड़कर सिलाई का प्रशिक्षण प्राप्त किया और अपना काम शुरू किया। समूह के माध्यम से ऋण लेकर उन्होंने मनिहारी की दुकान खोली। इसके बाद धीरे-धीरे अपने कारोबार का विस्तार करते हुए जनरल स्टोर, कपड़े की दुकान, ब्यूटी पार्लर और सिलाई केंद्र भी शुरू किया।

लगातार मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर रामरती ने अपनी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव किया है। आज वे 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं और उनकी सालाना शुद्ध आय एक लाख रुपये से अधिक है। उनकी सफलता न केवल उनके परिवार के लिए आर्थिक मजबूती का आधार बनी है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है।

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से रामरती जैसी महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उनकी यह सफलता ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और स्व-सहायता समूहों की प्रभावी भूमिका को भी दर्शाती है।

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  • रामरती लोधी – हितग्राही, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन
  • शशि दांगी – अन्य महिला
  • राधे तिवारी – ब्लॉक प्रबंधक, आजीविका मिशन, सागर
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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।