साईखेड़ा में शराबबंदी की मांग को लेकर ग्रामीणों का मोर्चा, पुलिस और आबकारी विभाग से कार्रवाई की मांग, देखें वीडियो
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ग्रामीणों का आरोप—गांव में कथित रूप से कच्ची और पक्की शराब की बिक्री, महिलाओं और पुरुषों ने सौंपा लिखित आवेदन
खरगोन/झिरनिया। ग्राम साईखेड़ा में कथित अवैध शराब बिक्री को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। गांव की महिलाओं और पुरुषों ने एकजुट होकर पुलिस और आबकारी विभाग को लिखित आवेदन सौंपते हुए गांव में कच्ची और पक्की शराब की बिक्री पर रोक लगाने तथा गांव को शराबमुक्त करने की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लंबे समय से कथित रूप से शराब की बिक्री की जा रही है। आवेदन में यह भी आशंका जताई गई है कि कुछ स्थानों पर कच्ची शराब में केमिकल या कीटनाशक जैसे हानिकारक पदार्थ मिलाए जा सकते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि यदि ऐसा हो रहा है तो यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों का कहना है कि शराब की समस्या का असर केवल नशे तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति, सामाजिक वातावरण और युवाओं के भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से केवल आश्वासन के बजाय प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
शराबबंदी की मांग को लेकर महिलाएं और पुरुष थाने भी पहुंचे। ग्रामीणों की ओर से रमेश चंद्र गहलोत ने बताया कि ग्रामीण अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंचे थे। थाना प्रभारी उस समय ड्यूटी के सिलसिले में बाहर थे। ग्रामीणों के अनुसार मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही गई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि शिकायत की निष्पक्ष जांच कर गांव में अवैध शराब की बिक्री पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए और बिक्री पर प्रभावी रोक लगाई जाए। ग्रामीणों की शिकायत के बाद अब पुलिस और आबकारी विभाग की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं।
जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि गांव में अवैध शराब की बिक्री के आरोपों में कितनी वास्तविकता है और प्रशासन की ओर से इस संबंध में क्या कार्रवाई की जाती है।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
ग्राम साईखेड़ा में अवैध शराब की बिक्री पर ग्रामीणों ने पुलिस और आबकारी विभाग से कार्रवाई की मांग की है। यह विषय ग्रामीण समाज में शराबबंदी के प्रयासों और कानून के पालन के संघर्ष को दर्शाता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि अवैध शराब से स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक समस्याएँ बढ़ती हैं, और ग्रामीणों का आक्रोश सरकार की नीतियों पर दबाव बनाता है। यदि इस पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों में शराब के दुरुपयोग से जुड़ी दुर्घटनाएँ, रोग और परिवारिक समस्याएँ बढ़ सकती हैं, जिससे समाज की समग्र भलाई प्रभावि