विदेश

सैटेलाइट तस्वीरों से खुलेगा नेपाल में आई बाढ़ का राज! तबाही की वजह जानने की कोशिश कर रहे वैज्ञानिक

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 28 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
सैटेलाइट तस्वीरों से खुलेगा नेपाल में आई बाढ़ का राज! तबाही की वजह जानने की कोशिश कर रहे वैज्ञानिक

Nepal Flash Flood: नेपाल और तिब्बत में आई भयानक बाढ़ से सैकड़ों लोगों की मौत हो गई है और कई लोग अभी भी लापता हैं. ऐसे में अधिकारियों को डर है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है. बुधवार को आई बाढ़ के बाद से तबाही की हजारों तस्वीरें और वीडियो सामने आ चुके हैं. वहीं दूसरी ओर राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है.

नेपाल में राहत बचाव अभियान जारी बता दें कि नेपाल और तिब्बत में बुधवार सुबह कुदरत ने कहर बरपा दिया. जहां विनाशकारी बाढ़ कई गांवों को बहाकर ले गई. इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 389 हो गई है.

जबकि करीब 1500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. लापता लोगों की तलाश के लिए युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने तबाही की वजह जानने और नुकसान का आकलन करने के लिए सैटेलाइट तस्वीरों की जांच शुरू कर दी है. सैटेलाइट तस्वीरों से खुलेगा नेपाल में आई बाढ़ का राज!

वैज्ञानिक नेपाल में आई बाढ़ की वजह जानने के लिए सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर रहा हैं. इन वैज्ञानिकों में जियोमॉर्फोलॉजिस्ट क्रिस्टन कुक और डैन शुगर शामिल हैं.

उन्होंने बताया कि बुधवार को मिली तस्वीरें साफ नहीं थीं और वे बस इतना ही देख पाए कि तिब्बत सीमा के पास लैंगटांग लिरुंग चोटी से ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर अलग हो गया था.

गुरुवार को उन्हें जो तस्वीरें मिलीं, उनमें वे देख पाए कि ग्लेशियर के नीचे की चट्टान (बेडरॉक) ढह गई थी, जिससे बर्फ का एक बड़ा हिस्सा भी नीचे आ गया और घाटी में बड़े-बड़े पत्थर और बर्फ फैल गए. सैटेलाइट तस्वीरें देखने के बाद क्या बोले वैज्ञानिक?

कैलगरी यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर शुगर ने कहा, "इससे पूरा इलाका बिना किसी रुकावट के साफ दिखाई दे रहा था. हमने देखा कि ऐसा लग रहा था कि न सिर्फ ग्लेशियर टूटा था, बल्कि पहाड़ की तरफ की चट्टान का एक बहुत बड़ा हिस्सा भी ढह गया था.

चट्टान का एक बड़ा हिस्सा ढहने की वजह से ग्लेशियर का कुछ हिस्सा भी उसके साथ नीचे आ गया." 'मलबा ढलान पर भी अपनी रफ्तार बनाए रहा' फ्रांस की यूनिवर्सिटी ग्रेनोबल आल्प्स में काम करने वाले कुक के मुताबिक, घाटी की जमीन से टकराने के बाद भी मलबा ढलान पर अपनी रफ्तार बनाए रहा.

नेपाल के कोलपुरतार, बेट्रावती और स्याप्रु बेसी इलाकों की सैटेलाइट से ली गई पहले और बाद की तस्वीरों से पता चलता है कि नदी अब काफी चौड़ी हो गई है और उसका रंग भूरा और काला हो गया है, क्योंकि कुछ जगहों पर यह अपने किनारों से बाहर बह गई और दूसरी जगहों पर इसमें मलबा भर गया.

कुक ने कहा कि पानी के रंग में बदलाव से पता चलता है कि बहाव में कितनी गाद (Sediment) थी; कीचड़ से भरे होने के कारण इसका रंग हरे-पन से बदलकर गहरा भूरा हो गया.

कुक ने कहा, "हालांकि अभी हम इस घटना को सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन से नहीं जोड़ सकते, लेकिन गर्म होती जलवायु के साथ इस तरह की और घटनाएं होना कोई हैरानी की बात नहीं है." उन्होंने कहा, "इतनी बड़ी नहीं, उम्मीद है कि इतनी बड़ी नहीं होगी." बाढ़ से उबरने में लग सकते हैं कई साल यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो एट बोल्डर के माउंटेन जियोोग्राफर (पहाड़ी इलाकों के भूगोल विशेषज्ञ) ऑल्टन बायर्स ने कहा कि अचानक आई बाढ़ ने "अपने पीछे बंजर जमीन छोड़ दी." उन्होंने कहा कि इससे उबरने में कई साल लग सकते हैं.

उन्होंने कहा कि उन्हें भी लगता है कि बुधवार की घटना ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हुई.

ये भी पढ़ें: नेपाल में 'महाप्रलय' के बाद हुई सर्वदलीय बैठक, 8 पार्टियों ने चीन को लेकर की ये मांग उन्होंने कहा, "मेरे हिसाब से, सभी संकेत वार्मिंग के असर की ओर इशारा करते हैं इस मामले में, पर्माफ्रॉस्ट (जमी हुई मिट्टी) जिसने हजारों सालों से ऊंचे इलाकों में चट्टानों, बर्फ, मिट्टी और ग्लेशियरों को एक साथ बनाए रखने में मदद की है- अब कमजोर और अस्थिर हो रहा है." ये भी पढ़ें: नेपाल में बाढ़ के बाद अब भूकंप का झटका, भोटेकोशी की नई झील से मंडराया बड़ा खतरा

📡 स्रोत: NewsData.io

📰 पूरी खबर पढ़ें (NewsData.io पर जाएं)
J
JKS News Desk

वॉयस ऑफ क्रांति की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।