अपराध

एक साल से लापता नाबालिग तहज़ीब का नहीं मिला सुराग, परिजनों ने पुलिस जांच पर उठाए सवाल

लेखक: Aazam Lala अंतिम अपडेट: 6 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
एक साल से लापता नाबालिग तहज़ीब का नहीं मिला सुराग, परिजनों ने पुलिस जांच पर उठाए सवाल

परिजनों का आरोप—संभावित लोगों के नंबर और सुराग देने के बावजूद जांच में तेजी नहीं आई; अब SDOP स्तर पर समीक्षा की उम्मीद

आज़म लाला की रिपोर्ट

सीहोर। अहमदपुर थाना क्षेत्र से सितंबर 2025 में लापता हुई नाबालिग तहज़ीब का करीब एक साल बाद भी कोई पता नहीं चल सका है। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने पुलिस को संभावित लोगों के मोबाइल नंबर, नाम और अन्य जानकारी उपलब्ध कराई, लेकिन इसके बावजूद तलाश में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई गई। परिवार अब मामले की जांच की उच्च स्तर पर समीक्षा की उम्मीद कर रहा है।

परिजनों के मुताबिक तहज़ीब 12 सितंबर 2025 को स्कूल गई थी, लेकिन वापस घर नहीं लौटी। परिवार ने पुलिस को जानकारी दी और उसके बाद से लगातार बेटी की तलाश की जा रही है। परिजनों का आरोप है कि उन्हें पुलिस की ओर से लगातार यही बताया जाता रहा कि लड़की की तलाश की जा रही है, लेकिन लगभग एक वर्ष बीतने के बावजूद उन्हें कोई ठोस सुराग नहीं मिला है।

परिवार ने आरोप लगाया कि उन्हें संदेह था कि अफजल नाम का युवक तहज़ीब को अपने साथ ले गया हो सकता है। इसी आधार पर उन्होंने पुलिस को करीब 25 रिश्तेदारों और परिचितों के मोबाइल नंबर भी उपलब्ध कराए, जिनसे संभावित रूप से संपर्क होने की आशंका थी। परिजनों का कहना है कि उन्होंने पुलिस को संभावित ठिकानों और अन्य जानकारियां भी दीं, लेकिन इन सुरागों पर कितनी जांच हुई, इसकी उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

परिजनों का यह भी आरोप है कि पुलिस की ओर से कई बार उनसे ही लड़की के बारे में जानकारी जुटाकर देने को कहा गया। परिवार का कहना है कि यदि उन्हें अपनी बेटी का ठिकाना पता होता तो वे स्वयं उसे लेकर पुलिस के पास पहुंच जाते। उनका कहना है कि वे चाहते हैं कि पुलिस अपनी जांच और तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए तहज़ीब का पता लगाए।

परिजनों ने कुछ ऐसे लोगों पर भी संदेह जताया है, जिनके बारे में उनका दावा है कि उन्हें तहज़ीब के संबंध में जानकारी हो सकती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में परिवार की ओर से लगाए गए इन आरोपों की जांच पुलिस द्वारा की जानी बाकी है।

परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि मामले की जांच से जुड़े कुछ पुलिसकर्मियों के अफजल के परिवार से कथित परिचय या मेलजोल थे। परिजनों का मानना है कि इससे जांच प्रभावित हो सकती है। हालांकि इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

परिजनों के मुताबिक अब मामले की फाइल SDOP स्तर पर पहुंची है। परिवार को उम्मीद है कि मामले की नए सिरे से समीक्षा होगी और पुराने सुरागों, मोबाइल नंबरों तथा संभावित ठिकानों की दोबारा पड़ताल की जाएगी।

परिजनों ने पुलिस से मांग की है कि मामले में अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी उन्हें दी जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन मोबाइल नंबरों और संभावित लोगों की जानकारी पुलिस को दी गई थी, उनकी जांच किस स्तर तक पहुंची और अब तक किन-किन स्थानों पर तलाश की गई।

परिवार का कहना है कि उन्हें अपनी बेटी की तलाश से ज्यादा किसी शिकायत या औपचारिक कार्रवाई की चिंता नहीं है। उनकी प्राथमिकता सिर्फ यह जानना है कि तहज़ीब कहां है और वह सुरक्षित है या नहीं।

करीब एक साल से नाबालिग के लापता होने का यह मामला अब भी अनसुलझा है। परिवार ने SDOP और नए थाना प्रभारी से मामले की गंभीरता से समीक्षा कर तहज़ीब की तलाश तेज करने की उम्मीद जताई है।

इस मामले में पुलिस का पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि मामले की पूरी तस्वीर सामने आ सके।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

इस खबर में अहमदपुर के सीहोर क्षेत्र से एक साल से लापता नाबालिग तहज़ीब के मामले पर चर्चा है, जहाँ परिजनों ने पुलिस को संभावित संदिग्धों के मोबाइल नंबर और अन्य सुराग दिए हैं। परिजनों का दावा है कि जांच में तेजी नहीं आई, जिससे वे SDOP स्तर पर समीक्षा की माँग कर रहे हैं। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नाबालिगों के संरक्षण और पुलिस कार्यवाही की पारदर्शिता को उजागर करता है। यदि पुलिस की जांच में देरी जारी रहती है, तो इससे समाज में विश्वास घट सकता है और समान मामलों में परिवारों को और अधिक निराशा हो स

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Aazam Lala

आज़म लाला भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं, जो लंबे समय से जनसमस्याओं और सामाजिक मुद्दों को अपनी पत्रकारिता के माध्यम से सामने लाते हैं। वे जमीनी स्तर की खबरों और जनसरोकार से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाते हैं।