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9 साल बाद RBI का बड़ा एक्शन, पहले चरण में बेच दिए 50000 करोड़ के बॉन्ड

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 24 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
9 साल बाद RBI का बड़ा एक्शन, पहले चरण में बेच दिए 50000 करोड़ के बॉन्ड

भारतीय रिजर्व बैंक इन दनों बैंकिंग सिस्टम से एक्स्ट्रा कैश या लिक्विडिटी खत्म करने के लिए ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) के तहत कुछ बॉन्ड्स बेचने का काम कर रहा है.

जिसका पहला चरण आज यानी 17 सितंबर को था. अपने पहले चरण में केंद्रीय बैंक ने करीब 50000 करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचे हैं.

इतना ही नहीं RBI ऐसा दोबारा भी कर सकता है, ताकि अगर आने वाले समय में ब्याज दर बढ़ाई जाती है, तो उसका असर बैंकों के लोन की ब्याज दरों पर जल्दी दिखाई दे.

9 साल बाद बेचे सरकारी बॉन्ड

RBI ने हाल ही में करीब 9 साल बाद पहली बार खुले बाजार में सरकारी बॉन्ड बेचे हैं.

केंद्रीय बैंक ने एक नीलामी के जरिए 5,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचकर बैंकिंग सिस्टम से इतनी ही रकम निकाल ली. इस नीलामी में निवेशकों की ओर से अच्छी मांग देखने को मिली.

RBI ने वित्त वर्ष 2029 से 2032 के बीच मैच्योर होने वाले सरकारी बॉन्ड बेचे हैं. इनकी बिक्री जिस ब्याज दर (यील्ड) पर हुई, वो बाजार के अनुमान से थोड़ी ज्यादा थी.

RBI अगले दो हफ्तों में 2,500-2,500 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचने की प्लानिंग भी कर रहा है.

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क्यों निकाला जा रहा बैंकों का पैसा?

बैंकिंग सिस्टम में एक्स्ट्रा नकदी यानी सरप्लस लिक्विडिटी 6 सितंबर को रिकॉर्ड 11.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी.

हालांकि, इसके बाद इसमें करीब एक-तिहाई की कमी आई है और अब ये लगभग 7.4 लाख करोड़ रुपये रह गई है. ये पैसा बैंकों के पास ज्यादा नकदी होने का संकेत है.

जब बैंकों के पास पर्याप्त पैसा होता है, तो उन्हें RBI से उधार लेने की जरूरत कम पड़ती है.

इससे RBI की नीतिगत ब्याज दर में बदलाव का असर बैंक लोन की ब्याज दरों तक पहुंचने में समय लग सकता है.

इसी वजह से RBI अतिरिक्त नकदी को धीरे-धीरे सिस्टम से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है.

अक्टूबर म

📡 स्रोत: ABP Live Vyapar

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