एक साल में सिर्फ 8.25% ग्रेजुएट्स को मिली नौकरी:80% डिग्री में प्रैक्टिकल और इंडस्ट्री एक्सपीरियंस नहीं; नीति आयोग की रिपोर्ट

भारत में पहले से कहीं अधिक ग्रेजुएट तैयार हो रहे हैं, लेकिन नीति आयोग की नई रिपोर्ट से पता चलता है कि देश ग्रेजुएशन के बल पर रोजगार देने की दिशा में पूरी तरह सफल नहीं है। 18 अगस्त को नीति आयोग द्वारा प्रकाशित पेपर Reimagining Skilling for Viksit Bharat @2047 के अनुसार, सिर्फ 8.25% ग्रेजुएट्स को रोजगार मिला है।
इस पेपर के आंकड़े आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार हैं। रिपोर्ट का फोकस 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लिए स्किलिंग, रोजगार और शिक्षा के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर है।
नीति आयोग द्वारा हाल ही जारी किये गए डाटा से ये सवाल उठता है कि उन करोड़ों युवाओं का क्या होगा जो अपने सालों साल की मेहनत डिग्री पाने में लगा देते हैं। लेकिन उन्हें ये पता नहीं होता कि ये पढ़ाई उनकी नौकरी की राह आसान करेगी या नहीं।
इंडस्ट्री की जरूरत के हिसाब से सिलेबस पुराना नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की उच्च और तकनीकी शिक्षा प्रणाली में जो पढ़ाया जाता है और लेबर मार्केट की जरूरत के बीच एक बड़ा फर्क है। कई संस्थानों में पढ़ाए जाने वाला पुराना सिलेबस इंडस्ट्री की बदलती जरूरतों के हिसाब से नहीं हैं।
इस वजह से डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट होने के बावजूद लोगों को आसानी से नौकरी नहीं मिल पाती है। एंट्री लेवल की नौकरियों के लिए भी स्किल्स जरूरी रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह के यूजी कोर्स के आधार पर नौकरी मिलना मुश्किल होता है।
हालांकि कई छात्र इसलिए भी ये डिग्री ले रहे हैं क्योंकि इनसे सरकारी भर्ती के लिए एलिजिबिटी मिलती है। ऐसा नहीं है कि बीए, बीकॉम या बीएससी की कोई कीमत नहीं है। सच तो यह है कि अक्सर इस डिग्री से स्टूडेंट या एम्प्लॉयर को यह पता नहीं चल पाता कि ग्रेजुएट असल में क्या काम कर सकता है।
नीति आयोग ने अपने पेपर में साफ कहा है कि बीए, बीकॉम या बीएससी की डिग्री पूरी करने पर शायद ही कभी सीधे नौकरी मिलती है।
आज एंट्री-लेवल की नौकरियों के लिए भी टैली (Tally) या ऑफिस एप्लिकेशन जैसे स्किल्स की जरूरत होती है। 34% छात्रों के लिए स्किल्स की कमी बड़ी समस्या नीति आयोग की रिपोर्ट में जिस अंतर को दिखाया गया है, वह न सिर्फ रोजगार के आंकड़ों में दिखता है, बल्कि खुद छात्रों की बातों में भी नजर आता है कि उन्हें किन चीजों की कमी महसूस होती है।
इससे शिक्षा व्यवस्था की मुख्य कमजोरी सामने आती है, जो स्
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar