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सम सैंड ड्यून्स पर सूर्यास्त के बाद एंट्री पर रोक

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 14 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
सम सैंड ड्यून्स पर सूर्यास्त के बाद एंट्री पर रोक

गोडावण सहित मरुस्थलीय वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए निर्देश जारी, रात में लेजर लाइट और अभयारण्य क्षेत्र में कचरा डालने पर विभाग की नजर

जैसलमेर,(14 अक्टूबर)। विश्वविख्यात पर्यटन स्थल सम सैंड ड्यून्स पर मरुस्थलीय पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने सूर्यास्त के बाद सम के धोरों में पर्यटकों के प्रवेश और ऊंट सफारी सहित अन्य पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य मरुस्थल के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखना और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में मानवीय हस्तक्षेप को कम करना है।

राष्ट्रीय मरु उद्यान (डीएनपी) के एसीएफ अशोक सिंह ने बताया कि सम सैंड ड्यून्स पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटन से क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलता है, लेकिन कुछ गतिविधियां मरुस्थलीय वन्यजीवों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने पर्यटन गतिविधियों में निर्धारित नियमों की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग के संज्ञान में आया है कि कुछ होटल और रिसॉर्ट संचालकों की ओर से व्यावसायिक कचरा सीधे अभयारण्य क्षेत्र में डाला जा रहा है। इसके अलावा रात के समय तेज लेजर लाइटों का इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

वन विभाग के अनुसार, प्लास्टिक, कांच की बोतलें और अन्य कचरा मरुस्थलीय पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जबकि तेज रोशनी और शोरगुल से वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार तथा उनके सुरक्षित आवास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।

जैसलमेर के मरुस्थलीय क्षेत्र में दुर्लभ पक्षी गोडावण यानी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण के प्रयास लगातार जारी हैं। हाल ही में राष्ट्रीय मरु उद्यान क्षेत्र में गोडावण को प्राकृतिक वातावरण में छोड़े जाने के बाद इनके संरक्षण को लेकर सतर्कता और महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में रात के समय तेज रोशनी, लेजर शो और अनावश्यक शोर जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण को वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से जरूरी माना जा रहा है।

वन विभाग ने होटल यूनियन के अध्यक्ष को पत्र जारी कर प्रतिबंधों की कड़ाई से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। रिसॉर्ट संचालकों से कहा गया है कि वे अपने कर्मचारियों और पर्यटकों को जागरूक करें तथा धोरों पर प्लास्टिक, कांच की बोतलें और अन्य कचरा नहीं फैलाने दें। साथ ही पर्यटन गतिविधियों के संचालन में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों का ध्यान रखने पर जोर दिया गया है।

वन विभाग का उद्देश्य पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना है, ताकि सम सैंड ड्यून्स की प्राकृतिक सुंदरता बरकरार रहे और गोडावण सहित अन्य मरुस्थलीय वन्यजीवों को सुरक्षित वातावरण मिल सके। विभाग की सख्ती से पर्यटन कारोबार से जुड़े संचालकों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है कि वे प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में सहयोग करें।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।