समस्तीपुर- सदर अस्पताल में महिला सिपाही की मौत का मामला:आईसीयू के नोडल पदाधिकारी समेत तीन डॉक्टरों से मांगा स्पष्टीकरण, लापरवाही का लगा था आरोप
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →समस्तीपुर सदर अस्पताल के आईसीयू में इलाज के अभाव में महिला सिपाही की मौत के मामले में स्वास्थ्य प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। सिविल सर्जन डॉ.
राजीव कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आईसीयू के नोडल पदाधिकारी समेत तीन डॉक्टरों से स्पष्टीकरण मांगा है। इनमें इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर संतोष कुमार, आईसीयू के नोडल पदाधिकारी डॉ. सत्येंद्र कुमार और डॉ.
एआर श्रीवास्तव शामिल हैं। सभी डॉक्टरों को 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद मामले में किसकी जिम्मेदारी बनती है, यह तय करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उधर, देर शाम पोस्टमार्टम के बाद मृतक महिला सिपाही का शव परिजनों को सौंप दिया गया। इससे पहले उसके पार्थिव शरीर को पुलिस लाइन परिसर में रखा गया, जहां एसपी अरविंद प्रताप सिंह समेत अन्य वरीय पुलिस पदाधिकारियों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
महिला सिपाही को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। इसके बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए उसके पैतृक गांव रोहतास भेज दिया गया। मालती कुमारी समस्तीपुर में अपने दो छोटे बच्चों और बुजुर्ग मां के साथ रहती थी। उनके पति खेती-बारी का काम करते हैं, इसलिए वह गांव में रहते हैं। पेट दर्द की शिकायत पर भर्ती हुई थी महिला सिपाही गुरुवार रात करीब तीन बजे समस्तीपुर पुलिस लाइन में तैनात महिला सिपाही मालती कुमारी को पेट दर्द की शिकायत हुई।
एक सहकर्मी महिला सिपाही उन्हें सदर अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंची, जहां उन्हें भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार के बाद इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर संतोष कुमार ने सांस लेने में परेशानी के कारण उन्हें आईसीयू रेफर कर दिया। आरोप है कि महिला सिपाही को आईसीयू तक ले जाने के लिए उस समय कोई कर्मी उपलब्ध नहीं था।
इसके बाद उनकी सहकर्मी सिपाही ही उन्हें आईसीयू तक लेकर गई। जब मुझे जानकारी मिली कि इमरजेंसी में ऑन ड्यूटी डॉक्टर नहीं हैं तो मैं खुद वहां पहुंचा। उन्हें यथासंभव बचाने का प्रयास किया गया। पुलिसकर्मियों का आरोप- आईसीयू में इलाज के लिए कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था हंगामा कर रहे पुलिसकर्मियों का आरोप था कि आईसीयू में उस समय कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था।
वहां एक मरीज का शव भी पड़ा था और आईसीयू का एसी बंद था। पुलिसकर्मियों के अनुसार, महिला सिपाही का वहां तत्काल उपचार शुरू नहीं हो सका। सूचना मिलने पर इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर संतोष कुमार आईसीयू पहुंचे, लेकिन तब तक महिला सिपाही की मौत हो चुकी थी। मौत की सूचना मिलने के बाद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी सदर अस्पताल पहुंच गए।
पुलिसकर्मियों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया और मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की। स्थिति को देखते हुए एसपी अरविंद प्रताप सिंह भी सदर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने डॉक्टरों के साथ बैठक की और पुलिसकर्मियों को समझाया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, ताकि मौत के वास्तविक कारण का पता चल सके।
हार्टअटैक से मौत की जताई जा रही संभावना महिला सिपाही की मौत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है। हालांकि, अस्पताल के डॉक्टरों के बीच चर्चा है कि मौत हार्टअटैक के कारण हो सकती है। चिकित्सकों के अनुसार, हार्टअटैक की स्थिति में पेट दर्द की शिकायत भी हो सकती है। मौत के कारण को लेकर अभी आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। बताया जा रहा है कि महिला सिपाही का ब्लड शुगर लेवल भी काफी बढ़ा हुआ था। हालांकि, मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। जांच के लिए कमेटी का होगा गठन सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ.
गिरीश कुमार ने बताया कि फिलहाल सिविल सर्जन स्तर से तीनों डॉक्टरों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। डॉक्टरों के जवाब मिलने के बाद मामले की जांच के लिए सिविल सर्जन स्तर से एक कमेटी का गठन किया जाएगा। जांच में जो भी डॉक्टर दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
समस्तीपुर सदर अस्पताल में महिला सिपाही की दुखद मृत्यु से हमें यह सिखने को मिलता है कि स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही और तत्परता अनिवार्य है। जब किसी की जान जोखिम में हो, तो त्वरित और समन्वित चिकित्सा सहायता ज़रूरी है। समाज को चाहिए कि चिकित्सा संस्थानों में पारदर्शिता और निगरानी को मजबूत किया जाए, ताकि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।