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सम्राट चौधरी के जिले मुंगेर में बाढ़–378 गांव पानी में:लोग बोले-7 फीट तक पानी आ गया,कोई हाल पूछने भी नहीं आ रहा;जानिए कैसे कट रही जिंदगी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 11 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
सम्राट चौधरी के जिले मुंगेर में बाढ़–378 गांव पानी में:लोग बोले-7 फीट तक पानी आ गया,कोई हाल पूछने भी नहीं आ रहा;जानिए कैसे कट रही जिंदगी

“6 दिन से मेरे घर में पानी भरा है। हर दिन पानी एक हाथ से ज्यादा बढ़ रहा है। जिसकी वजह से पानी अब 7 फीट तक पहुंच चुका है। घर के अंदर कदम रखने तक की जगह नहीं बची है। सांप-बिच्छू भी घर में घुस रहे हैं। इनके बीच हमें अपना जान जोखिम में रखकर रहना पड़ रहा है। इसके बावजूद अब तक न कोई CO, न कोई नेता हमारे हालात देखने आए हैं। हमें कोई राहत सामाग्री भी नहीं मिल रही है। समझ नहीं आ रहा कि अगर पानी और बढ़ा तो हम अपने बच्चों और परिवार को लेकर कहां जाएंगे।” ये कहना है परमानंद यादव का, जिनके घर में 7 फीट से ऊपर तक पानी आ चुका है...

बता दें कि मुंगेर में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के विधानसभा क्षेत्र असरगंज तक बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले के 6 प्रखंडों की 37 पंचायतों के 378 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। करीब 3.05 लाख लोग इसकी चपेट में हैं। प्रशासन का दावा है कि राहत-बचाव के लिए शेल्टर, सामुदायिक रसोई, नाव, मेडिकल कैंप और SDRF की व्यवस्था की गई है। लेकिन जमीन पर तस्वीर पूरी तरह अलग दिखती है। बाढ़ पीड़ितों का कहना है, अगर कम्यूनिटी किचन चलाया जा रहा है तो ये हमारी पहुंच से दूर क्यों है?

हमलोगों को तंबू लगाकर क्यों रहना पड़ रहा है?

यानी सरकारी रिकॉर्ड में राहत की तैयारी है, लेकिन बाढ़ के पानी में फंसे लोगों का सवाल है कि यह तैयारी उन तक क्यों नहीं पहुंच रही...

सवाल यह है कि सीएम के विधानसभा क्षेत्र तक बाढ़ का पानी पहुंच गया, इसके लिए प्रशासन क्या कर रहा है? सरकारी इंतजाम बाढ़ में घिरे परिवारों के लिए कितने हैं? क्या ये जरूरतमंदों तक पहुंच पा रही है या नहीं?

CM के जिले से भास्कर की बाढ़ पर पड़ताल... पहले देखें बाढ़ से जुड़ी तस्वीरें...

गंगा खतरे के निशान से ऊपर, निचले इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा मुंगेर में रविवार शाम गंगा का जलस्तर 39.94 मीटर पहुंच गया। यह खतरे के निशान 39.33 मीटर से 61 सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर बढ़ने के साथ नदी किनारे और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ रहा है। जिले के 6 प्रखंडों की 37 पंचायतों के 378 गांव बाढ़ की चपेट में हैं।

करीब 3 लाख 5 हजार 500 लोग और 61 हजार 100 परिवार प्रभावित हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के विधानसभा क्षेत्र असरगंज तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। कई घरों में करीब 7-7 फीट तक पानी पहुंच चुका है। सरकार और प्रशासन की ओर से 66 शेल्टर, 58 सामुदायिक रसोई और राहत-बचाव के लिए 118 निजी नावों की व्यवस्था का दावा है, जबकि 52 सामुदायिक रसोई और 52 नावें फिलहाल संचालित हैं।

मुंगेर किला तक भरा पानी, पीड़ित बोले- देखने तक नहीं आया कोई मुंगेर किला के पास रह रहे देवी सैनी ने बताया, ये पर्यटक स्थल है। यहां पर अक्सर लोग घूमने आया करते हैं। हालांकि, गंगा नदी से जगह ज्यादा दूर नहीं होने की वजह से यहां पर भी 5-6 फीट तक पानी आ गया है। मैं यहीं का निवासी हूं। हमलोग पानी में फंसे हैं।

हमारी परेशानी देखने अभी तक कोई वार्ड कमिश्नर नहीं आया। पूरा परिवार परेशान है। दिन-रात पानी के बीच रहना पड़ रहा है। लोग सड़क पर किसी तरह समय काट रहे हैं, रात में रहने और राहत की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। मुख्यमंत्री भी इसी जिले से हैं, इसलिए उम्मीद है कि बाढ़ में फंसे लोगों की परेशानी जल्द दूर होगी।

'राहत लिस्ट में चेहरा और वोट नहीं देखा जाए' पूर्व वार्ड पार्षद प्रतिनिधि प्रमोद कुमार ने बाढ़ प्रभावित लोगों की लिस्ट को लेकर सवाल उठाया है। उनका कहना है, निचले इलाकों में पानी तेजी से बढ़ रहा है और कई घर पूरी तरह डूब चुके हैं। राहत शिविर या बाढ़ पीड़ितों की लिस्ट तैयार करते समय किसी की जाति, चेहरा या वोट नहीं देखा जाना चाहिए।

जो भी व्यक्ति बाढ़ से प्रभावित है, उसका नाम बिना किसी भेदभाव के लिस्ट में शामिल किया जाए। पहले भी हमारे परिवार और समाज के लोगों के नाम वोटिंग लिस्ट से हटाए गए थे। इसकी शिकायत अधिकारियों से की गई थी। सरकारी दफ्तर में 3 फीट पानी, कागजात बचाने में जुटे कर्मचारी बरियारपुर के प्रखंड और अंचल कार्यालय परिसर में करीब तीन फीट पानी पहुंच गया है।

जिस कार्यालय में सामान्य दिनों में लोगों की समस्याओं का समाधान होता है, वहां अब कर्मचारियों के सामने अपने रिकॉर्ड और जरूरी कागजात बचाने की चुनौती है। सहायक प्रशासनिक पदाधिकारी रंजीत पास्मा ने बताया, प्रखंड और अंचल कार्यालय में पूरी तरह पानी घुस चुका है। आने-जाने में काफी परेशानी हो रही है।

बाढ़ के बीच सरकारी कागजात और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। परिसर में सांप भी निकल रहे हैं। ऐसे माहौल में कर्मचारी किसी तरह कार्यालय पहुंचकर काम कर रहे हैं। बाढ़ का असर सरकारी कामकाज पर भी पड़ा है। आम लोगों का ऑफिस आना-जाना कम हो गया है, जिससे कई काम प्रभावित हुए हैं।

एक तरफ 66 शेल्टर- 58 किचन की तैयारी, दूसरी तरफ सड़क पर परिवार प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 66 शेल्टर और 58 सामुदायिक रसोई की तैयारी की गई है। इनमें 52 कम्यूनिटी किचन चल रहे हैं, लेकिन ग्राउंड पर मौजूद बाढ़ पीड़ितों का कहना है- हमें कोई खाना नहीं मिल रहा है।

यहां तक की हमलोगों को अपने-अपने घरों को छोड़कर सड़क किनारे या ऊंची जगहों पर जाना पड़ रहा है। बता दें कि बरियारपुर से निचले इलाकों की ओर जाने वाले रास्तों में ऐसे परिवार दिखाई दे रहे हैं, जिन्होंने पानी से बचने के लिए अस्थायी तंबू बना लिए हैं। बाढ़ के दौरान आवागमन और राहत-बचाव के लिए प्रशासन ने 118 निजी नावों की व्यवस्था की है।

इनमें 52 नावें फिलहाल चल रही हैं। SDRF की टीम भी तैनात है। जिले में 35 प्रशिक्षित गोताखोर और 299 आपदा मित्र उपलब्ध बताए गए हैं। प्रशासन के मुताबिक इनका इस्तेमाल फंसे लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने में किया जा रहा है। इसके बावजूद दियारा और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सुरक्षित स्थान तक पहुंचना अभी भी चुनौती है।

बाढ़ प्रभावितों के लिए 30 स्वास्थ्य कैंप, 6 मोबाइल मेडिकल टीम और 2 बोट एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। पशुओं के लिए भी 20 राहत शिविर चिन्हित किए गए हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को 7 हजार रुपए की अनुग्रह राहत राशि देने की व्यवस्था भी बताई गई है। परिवारों की पहचान और आधार सत्यापन का काम किया जा रहा है, ताकि राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जा सके।

यानी कागज पर राहत के लिए कई स्तर पर व्यवस्था है। मगर दूसरी तरफ पीड़ितों की शिकायतें बताती हैं कि सिर्फ व्यवस्था तैयार रखना और उसका जरूरतमंद तक समय पर पहुंचना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। 150 से ज्यादा स्कूल पानी में, हजारों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है।

सदर, बरियारपुर, जमालपुर और धरहरा समेत प्रभावित इलाकों के 150 से ज्यादा सरकारी स्कूलों में पानी भर चुका है। कई स्कूलों में 6 से 7 फीट तक पानी बताया जा रहा है। इससे 5 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स की पढ़ाई प्रभावित हुई है। बाढ़ प्रभावित इलाकों के स्कूल बंद हैं और शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेजा गया है।

सदर मुंगेर और बरियारपुर के दियारा इलाके में स्थिति और गंभीर है। कुतलुपुर, जफरनगर, तारापुर दियारा, नयागढ़ी उत्तर पंचायत का सीताकुंड डीह, मुदला मुशहरी, लालजी टोला, हरिनमार और झौवाबहियार जैसे इलाके बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। कई जगह लोगों ने घर की छतों पर शरण ली है। जिन परिवारों ने घर छोड़ा, वे मवेशियों के साथ सुरक्षित जगह तलाश रहे हैं।

बबुआ घाट पर सीताचरण गांव से दो दर्जन से ज्यादा परिवार मवेशियों के साथ पहुंचे। इनके सामने सबसे बड़ी चिंता सिर छिपाने के साथ पशुओं को बचाने की भी है। चंडिका स्थान में 7 फीट पानी, मंदिर पूरी तरह बंद मुंगेर के प्रसिद्ध शक्तिपीठ चंडिका स्थान में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। रविवार को मंदिर परिसर में करीब 7 फीट पानी भर गया था।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए मंदिर को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। गंगा का पानी बढ़ने के साथ मंदिर के आसपास के इलाकों में भी पानी का फैलाव बढ़ रहा है। सामान्य दिनों में जहां श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है, वहां अब पानी का कब्जा है। जिन परिवारों के घरों में पानी भर गया है और जिन्हें खुले या अस्थायी स्थानों पर रहना पड़ रहा है, उनके बीच पॉलीथिन शीट भी बांटा जा रहा है।

फिलहाल, यह शीट उन परिवारों के लिए छत का काम कर रही है, जो घर से निकलकर सड़क या ऊंचे स्थान पर रहने को मजबूर हैं। प्रशासन के पास अतिरिक्त पॉलीथिन शीट का स्टॉक भी उपलब्ध है। बाढ़ सिर्फ घरों तक नहीं, खेतों तक भी पहुंची बाढ़ का असर खेती पर भी पड़ा है। प्रशासनिक आकलन में करीब 9,477 हेक्टेयर फसल प्रभावित होने का प्रारंभिक अनुमान है।

धान, मक्का, अरहर, सब्जियों सहित खरीफ की फसलों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, कृषि विभाग का कहना है कि पानी निकलने के बाद ही फसल नुकसान का वास्तविक आकलन हो सकेगा। अभी खेतों में पानी जमा होने के कारण यह तय करना मुश्किल है कि कितनी फसल पूरी तरह बर्बाद हुई है और कितनी बच सकती है। बाढ़ के साथ गंगा के कटाव का खतरा भी बढ़ गया है।

सुंदरपुर-लगमा, टीकारामपुर और बरियारपुर के कई नदी किनारे के इलाकों को संवेदनशील माना गया है। जहां कटाव का खतरा बढ़ा, वहां प्रशासन ने बालू भरे बैग, बांस और अन्य सामग्री से तत्काल सुरक्षात्मक कार्य कराया है। बैजनाथ चौधरी टोला और रामबाबू सिंह टोला के पास कटाव वाले हिस्सों को फिलहाल सुरक्षित बताया गया है।

लेकिन जलस्तर लगातार बढ़ने की स्थिति में इन इलाकों की चुनौती बनी हुई है। खड़गपुर-तारापुर क्षेत्र में महाने नदी पर बन रहे हाईलेवल पुल का डायवर्जन क्षतिग्रस्त हो गया है। इसके कारण दोनों तरफ का यातायात रोक दिया गया है। इसके अलावा कई ग्रामीण सड़कों के हिस्से भी पानी में डूब गए हैं। इससे बाढ़ प्रभावित गांवों तक सामान्य आवागमन प्रभावित हुआ है।

पानी उतरने के बाद सड़क और डायवर्जन को हुए नुकसान का वास्तविक आकलन किया जाएगा। ललन सिंह ने बाढ़ को लेकर जिले में की मीटिंग वहीं, रविवार की शाम केंद्रीय मंत्री ललन सिंह मुंगेर पहुंचे। वहां उन्होंने अधिकारियों के साथ बाढ़ को लेकर मीटिंग की। इस दौरान उन्होंने कहा, बिहार में कम बारिश के बावजूद बाढ़ का खतरा बना रहता है, क्योंकि गंगा में नेपाल और ऊपरी इलाकों से आने वाली कोसी, गंडक और बूढ़ी गंडक जैसी नदियों का पानी पहुंचता है।

चार साल तक सिंचाई मंत्री रहते हुए मुझे इसका अनुभव रहा है। मुंगेर में बाढ़ की स्थिति को लेकर जिला प्रशासन से पूरी जानकारी ली गई है। प्रशासन राहत और बचाव के लिए तैयार है। मेडिकल कैंप, SDRF टीम और कम्युनिटी किचन की व्यवस्था की जा रही है। प्रभावित लोगों के खाने और रहने की पूरी व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।

कम्युनिटी किचन में पूड़ी की जगह चावल, दाल और सब्जी जैसे पक्के भोजन देने को कहा गया है, ताकि खराब तेल से बीमारी का खतरा न रहे। साथ ही साफ-सफाई और पानी निकलने के बाद ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव की भी तैयारी है। बता दें कि इस साल मुंगेर में बाढ़ की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बेगूसराय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा की थी।

इसके अलावा जमालपुर विधायक नचिकेता मंडल, मुंगेर के डीएम कुमार प्रणय और रविवार को बिहार के आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा भी मुंगेर पहुंचे। इन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति, राहत-बचाव कार्य और प्रशासनिक तैयारियों की जानकारी ली। बक्सर से भागलपुर तक लाल निशान के पार गंगा बिहार के 18 जिले बाढ़ की चपेट में है।

इन जिलों के करीब 6.65 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। बक्सर से भागलपुर तक गंगा लाल निशान से ऊपर है। गंगा और पुनपुन के रौद्र रूप से पटना समेत और स्थिति गंभीर हो गई है। पटना के गांधी घाट पर गंगा ने 10 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। शनिवार को यहां जलस्तर 50.57 मीटर पहुंच गया। वर्ष 2016 में गांधी घाट पर अधिकतम जलस्तर 50.52 मीटर दर्ज किया गया था।

पुनपुन नदी खतरे के निशान से 2.75 मीटर ऊपर बह रही है। इसके कारण पटना के दक्षिणी इलाकों में सुरक्षा बांध कई जगह टूट गए हैं। कुछ जगहों पर पानी ओवरफ्लो कर गया। इससे दक्षिण पटना का बड़ा इलाका जलमग्न हो गया है। पटना-गया रेलखंड और मोकामा एनएच पर पानी चढ़ गया है। इससे यातायात प्रभावित हुआ है।

सोन नदी का जलस्तर बढ़ने से बिहटा प्रखंड के तटवर्ती गांवों में बाढ़ का संकट गहरा गया है। चारों ओर पानी फैलने से करीब 20 हजार की आबादी प्रभावित हुई है। कई गांवों में घरों तक पहुंचने वाले रास्ते डूब गए हैं। पटना-मोकामा एनएच और पटना-गया रेललाइन पर पानी चढ़ने से यातायात बाधित हो गया है। दियारा समेत दक्षिण पटना का इलाका जलमग्न है।

प्रभावित इलाकों में स्कूल और अस्पताल बंद हैं। शनिवार सुबह इंद्रपुरी बराज से सोन में पानी छोड़े जाने के बाद 4 घंटे में 10 सेमी पानी बढ़ गया, जिससे हालात बिगड़े। गंगा, पुनपुन, दरधा और लोकाइन नदियों में उफान के बाद रिंग बांध और सड़कें कई जगहों पर टूट गईं। जानिए किन जिलों में बाढ़ की क्या है स्थिति बेगूसराय में गंगा का जलस्तर काफी तेजी से बढ़ रहा है।

जिसके कारण रोज नए इलाकों में पानी घुसने लगा है। बरौनी प्रखंड के सिमरिया बिंद टोली में भी 1000 से अधिक घर डूब चुके हैं। सारण के दिघवारा प्रखंड के केसरपुर गांव के पास माही नदी का बांध लगभग 30 फीट में टूट चुका है। इससे त्रिलकचक, करैया और बरुआ पंचायत सहित दिघवारा की बड़ी आबादी प्रभावित हो सकती है।

सारण डीएम, एसपी , सोनपुर एसडीएम, डीएसपी समेत कई अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। राहत बचाव कार्य जारी है। खगड़िया में बाढ़ की वजह से हालात बिगड़ने लगे हैं। लोगों के घर डूब चुके हैं। परबत्ता प्रखंड के माधवपुर पंचायत के लोग उफनते नदी-नालों को पार कर के सुरक्षित जगहों पर जा रहे हैं। कुछ लोग अपने मवेशियों को कंधे पर लेकर पानी पार करते भी दिखाई दिए।

छपरा में NH-19 पर बाढ़ का पानी चढ़ जाने से आवागमन प्रभावित होने लगा है। सड़क पर पानी पहुंचने के बाद राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भागलपुर में गंगा 2 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही है। इससे राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध पर दबाव बढ़ा है। जल संसाधन विभाग के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में भागलपुर में गंगा का जलस्तर 46 सेमी बढ़ा है।

यहां पहली बार गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 32 सेमी ऊपर पहुंचा है। कहलगांव में गंगा लाल निशान से 82 सेमी ऊपर है। पटना में गंगा और पुनपुन खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, लेकिन शहर को फिलहाल बाढ़ से कोई खतरा नहीं है। गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर पिछले 10 साल (2016) के रिकॉर्ड 50.52 मीटर से अभी 14 सेमी नीचे (50.38 मीटर) है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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