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संभल में श्रीवंशगोपाल कल्कि धाम पर उमड़ी आस्था:5,242 साल पुराने कदंब वृक्ष की परिक्रमा कर रहे श्रद्धालु

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 5 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
संभल में श्रीवंशगोपाल कल्कि धाम पर उमड़ी आस्था:5,242 साल पुराने कदंब वृक्ष की परिक्रमा कर रहे श्रद्धालु

संभल में शुक्रवार सुबह से संभल शहर से करीब 5 किलोमीटर दूर वैनीपुर चक गांव स्थित श्रीवंशगोपाल कल्कि धाम तीर्थ पर जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भक्त भजन-कीर्तन कर रहे हैं और भगवान श्रीकृष्ण द्वारा स्थापित माने जाने वाले श्रीगोपालेश्वर महादेव पर जल चढ़ा रहे हैं।

मंदिर परिसर में श्रद्धालु भगवान को झूला भी झुला रहे हैं। 5242 साल पुराने कदंब वृक्ष की परिक्रमा कर लोग अपनी मनोकामनाएं मांग रहे हैं।

रात में गांव से राधा-कृष्ण की झांकी भी निकाली जाएगी। 68 तीर्थों में शामिल माना जाता है वंशगोपाल तीर्थ संभल महात्म्य और महंत भगवतप्रिय महाराज के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं में वंशगोपाल तीर्थ को संभल के 68 तीर्थों और 19 पवित्र कुओं में से एक माना जाता है।

मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण देवी रुक्मणी का हरण कर कुंदनपुर से लौटते समय इस स्थान पर पहुंचे थे। उन्होंने जंगल में कदंब के पेड़ के नीचे रात बिताई थी।

कलियुग में कल्कि अवतार की मान्यता धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी स्थान पर श्रीकृष्ण ने रुक्मणी को बताया था कि कलियुग में वे इसी संभल नगरी में कल्कि अवतार के रूप में जन्म लेंगे।

इसके बाद उन्होंने ब्रह्माजी को बुलाकर गोपलेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना कराई और यहां पवित्र तीर्थ की स्थापना का आदेश दिया, ताकि श्रद्धालु यहां स्नान कर पुण्य अर्जित कर सकें। कदंब वृक्ष से जुड़ी आस्था महंत भगवतप्रिय महाराज के मुताबिक, वंशगोपाल का कल्पतरु कदंब वृक्ष करीब 5242 साल पुराना माना जाता है।

मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इसी वृक्ष की छांव में विश्राम किया था। श्रद्धालुओं में इस पेड़ को लेकर गहरी आस्था है। मान्यता है कि इसकी परिक्रमा करने से संतान सुख मिलता है और वंश की वृद्धि होती है। इसी वजह से इस स्थान को श्रीवंशगोपाल तीर्थ के नाम से जाना जाता है।

हर साल होती है 24 कोसीय परिक्रमा महंत के अनुसार, यहां दिवाली और भाईदूज के अगले दिन फेरी परिक्रमा की परंपरा है। 24 कोसीय इस परिक्रमा में देशभर से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसकी शुरुआत वंशगोपाल तीर्थ से होती है और समापन भी यहीं पर होता है।

जन्माष्टमी के मौके पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना और परिक्रमा कर रहे हैं।

📡 स्रोत: NewsData.io

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

संभल के पास वैनीपुर चक गांव में स्थित श्रीवंशगोपाल कल्कि धाम पर जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धालु 5,242 साल पुराने कदंब वृक्ष की परिक्रमा कर रहे हैं। यह तीर्थ भगवान श्रीकृष्ण द्वारा स्थापित माना जाता है, जहाँ भक्त भजन-कीर्तन करते हैं और जल चढ़ाते हैं। यह घटना धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है, जिससे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा और पर्यटन आकर्षण बढ़ता है। आम जनता के लिए यह एक आध्यात्मिक अनुभव है, जो मनोबल बढ़ाता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी योगदान देता है।

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