संजय राउत बोले- जेल जाने के बाद उन्हें कैंसर हुआ:राहुल ने पॉइजन टेस्ट की सलाह दी थी: करप्शन के आरोप में 100 दिन जेल में रहे थे
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने शनिवार को दावा किया कि उन्हें जेल में रहने के दौरान ही कैंसर की बीमारी शुरू हुई थी। राउत 2022 में पत्रा चॉल पुनर्विकास से जुड़े भूमि घोटाला केस में 100 से ज्यादा दिन जेल में रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उन्हें टॉक्सिसिटी टेस्ट कराने की सलाह दी थी, ताकि पता चल सके कि उनके खाने में जहर तो नहीं मिलाया गया था।
राउत ने कहा कि मौजूदा सरकार इतनी क्रूर है कि वह कुछ भी कर सकती है। जेल में रहे दूसरे राजनीतिक नेताओं की हालत भी खराब है। 2022 में राउत की गिरफ्तारी, आर्थर रोड जेल में बंद रहे संजय राउत को 1 अगस्त 2022 को ED ने गिरफ्तार किया था। वह मुंबई की आर्थर रोड जेल में 101 दिन रहे। 9 नवंबर 2022 को PMLA कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आए।
संजय की गिरफ्तारी गोरेगांव के पत्रा चॉल पुनर्विकास प्रोजेक्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई थी। ED ने राउत पर मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी भूमिका का आरोप लगाया था। राउत ने आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया था। संजय को 2025 में कैंसर का पता चला, इलाज जारी संजय राउत के मुताबिक, उन्हें पेट के कैंसर का पता नवंबर 2025 में दिवाली से करीब 2-4 दिन पहले चला था।
उनके भाई सुनील राउत ने जांच के लिए ब्लड टेस्ट कराया था, जिसके बाद कैंसर की पुष्टि हुई। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने अपने कड़वे अनुभवों पर 'नरकातला स्वर्ग' (नरक में स्वर्ग) नाम से एक मराठी किताब भी लिखी थी। संजय राउत उद्धव ठाकरे के करीबी हैं संजय राउत उद्धव ठाकरे के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति में महाविकास अघाड़ी (MVA) का बड़ा चेहरा हैं। राजनीति में आने से पहले वे पत्रकार थे। शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की तरफ से शुरू किए गए मराठी समाचार पत्र 'सामना' के कार्यकारी संपादक हैं।
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
जेल में बिताया समय और उससे उत्पन्न स्वास्थ्य समस्याएँ हमें यह सिखाती हैं कि न्यायिक प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना अनिवार्य है। किसी भी विवाद का समाधान कानूनी मार्ग और संवाद से ही होना चाहिए, न कि हिंसा से। समाज को चाहिए कि वह स्वास्थ्य संरक्षण के लिए बेहतर सुविधाएँ और जाँच प्रणालियाँ स्थापित करे, ताकि किसी की भलाई पर कोई भी अनावश्यक जोखिम न पड़े।