सांसद चंद्रशेखर आजाद को गाली देने वाली महिलाओं पर FIR:SC-ST एक्ट समेत 6 धाराओं में केस, विनोद साहनी हत्याकांड में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था वीडियो
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →गोंडा जिले की कौड़िया बाजार थाना क्षेत्र के बौनापुर गांव की पल्लवी शुक्ला और इटियाथोक कोतवाली क्षेत्र के मर्दन पुरवा गांव की काजल सिंह को विनोद साहनी हत्याकांड को लेकर भीम आर्मी चीफ और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को सोशल मीडिया पर गाली देना महंगा पड़ गया। इन दोनों ने अभद्र टिप्पणी और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया था।
कौड़िया थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर योगेंद्र यादव ने शनिवार देर रात करीब 11:30 बजे इन दोनों के खिलाफ 6 गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। इस मुकदमे की कॉपी आज रविवार सुबह 11 बजे सामने आई। कौड़िया थाने की पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पूरे मामले की जांच सीओ करनैलगंज आनंद राय को सौंपी गई है।
इन महिलाओं का गाली देते हुए अभद्र और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। पुलिस ने वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर यह कार्रवाई की है। सब-इंस्पेक्टर योगेंद्र यादव ने बताया कि सोशल मीडिया पर सामने आया कि दो महिलाएं आपत्तिजनक और भड़काऊ वीडियो पोस्ट कर माहौल खराब करने की कोशिश कर रही हैं।
जांच में पता चला कि इस वीडियो को 'रामकिशुन सामाजिक कार्यकर्ता' नाम के एक्स अकाउंट पर पोस्ट कर आपत्ति जताई गई थी। वीडियो में काजल सिंह और पल्लवी शुक्ला यह कहती दिख रही हैं कि, “इन पर 4 मुकदमे हैं और मुझ पर 22 मुकदमे हैं। ना ही मैं डरती हूं, ना ही यह हाई कोर्ट से स्टे है। चाहे एक एफआईआर हो, चाहे एफआईआर फिर हो।” इसके बाद उन्होंने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को जमकर गाली देते हुए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर सार्वजनिक तौर पर अपमानित किया।
जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गोंडा आने पर धमकी दिए जाने और मां बहन की गाली गलौज का वीडियो वायरल है। ऐसे में इस भड़काऊ और विवादित वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भीम आर्मी संगठन के समर्थकों,पदाधिकारियों और बहुजन समाज के लोगों की भावनाएं आहत हुई है जिससे क्षेत्र में काफी आक्रोश है।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
सभी को याद दिलाना चाहेंगे कि गुस्सा और अपमान कभी समाधान नहीं होते। जब भी किसी विवाद का सामना हो, शांत मन से कानूनी मार्ग अपनाएँ—साक्ष्य जुटाएँ, पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराएँ, और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखें। समाज में सहिष्णुता और संवाद की संस्कृति को बढ़ावा दें, ताकि हर व्यक्ति अपनी असंतुष्टि को रचनात्मक ढंग से व्यक्त कर सके। इस तरह हम न केवल व्यक्तिगत शांति, बल्कि समग्र समाज की शांति भी सुनिश्चित करते हैं।