राजनीति

सांसद राजकुमार रोत ने भाजपा पर साधा निशाना:परिसीमन और 'एक देश, एक चुनाव' पर घेरा; सागवाड़ा में बीएपी उम्मीदवारों के समर्थन में की बैठकें

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 18 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
सांसद राजकुमार रोत ने भाजपा पर साधा निशाना:परिसीमन और 'एक देश, एक चुनाव' पर घेरा; सागवाड़ा में बीएपी उम्मीदवारों के समर्थन में की बैठकें

बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत रविवार को डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा क्षेत्र के दौरे पर रहे। अपने दौरे के दौरान सांसद राजकुमार रोत ने सागवाड़ा के अलग-अलग गांवों में चुनावी बैठकें लेते हुए बीएपी उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार किया। वही इस दौरान सांसद राजकुमार रोत ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा।

सांसद राजकुमार रोत ने बर्बोदनिया, घाटा का गांव, लिंबडिया, खड़गदा, लिमडी, किशनपुरा गांवों में जाकर पंचायती राज चुनाव को लेकर बैठकें की। इस दौरान सांसद राजकुमार रोत ने जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्यों के लिए खड़े बीएपी के समर्थन में प्रचार करते हुए जनता से वोट मांगे। परिसीमन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए इस मौके पर सांसद रोत ने भाजपा सरकार और उसकी नीतियों पर जमकर हमला बोला।

रोत ने परिसीमन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा ने चुनावों में हार के डर से पंचायतों, वार्डों और जिला परिषदों की सीमाओं में मनमाने ढंग से बदलाव किए हैं। भाजपा पहले से ही हार मान चुकी है और इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि उन्होंने परिसीमन में भारी गड़बड़ी की है। परिसीमन हमेशा भौगोलिक परिस्थितियों और जनता की सहूलियत को ध्यान में रखकर होना चाहिए, लेकिन वर्तमान सरकार ने केवल अपनी राजनीतिक सुविधा के हिसाब से वार्डों और सीमाओं को तोड़ा-मरोड़ा है।

वन नेशन, वन इलेक्शन' पर घेरा 'एक देश, एक चुनाव' की अवधारणा पर तीखा प्रहार करते हुए सांसद ने कहा कि यदि दिल्ली के सांसद से लेकर गांव के सरपंच तक के चुनाव एक साथ कराए जाएंगे, तो इससे गांव, गरीब और किसान के बुनियादी मुद्दे पूरी तरह से गायब हो जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर चुनाव का दायरा और मुद्दा अलग होता है।

पंचायती राज में गांव की सड़कों, पानी, बिजली और स्कूलों के मुद्दे होते हैं। जबकि देश के चुनाव में राष्ट्रीय नीतियां। एक साथ चुनाव कराने से ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक समस्याएं राष्ट्रीय नारों के शोर में दब जाएंगी। अर्थव्यवस्था और जीडीपी का सच कुछ और, कागजों पर कुछ और देश की आर्थिक स्थिति और विकास के दावों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि आज देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति लगातार नीचे जा रही है।

वास्तविक धरातल पर गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई से जनता परेशान है, जबकि सरकार झूठे आंकड़ों और प्रचार के जरिए जीडीपी की गुलाबी तस्वीर पेश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान आम जनता को मजबूत बनाने के बजाय अपने संगठन और उससे जुड़े आर्थिक तंत्र को मजबूत करने पर केंद्रित है।

जनता की सोच और वोट से ही बदलेगी व्यवस्था राजकुमार रोत ने ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं से एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों की इस सोच को बदलने का एक ही जरिया है पंचायती राज और आगामी चुनावों में जनता अपने मत की ताकत से इन्हें करारा जवाब दे और अपने अधिकारों की रक्षा करे।

📡 स्रोत: NewsData.io

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