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संस्कारहीन नौजवान देश को आगे नहीं बढ़ा सकता: विधानसभा के अध्यक्ष श्री तोमर

लेखक: AIR Bhopal अंतिम अपडेट: 30 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
संस्कारहीन नौजवान देश को आगे नहीं बढ़ा सकता: विधानसभा के अध्यक्ष श्री तोमर

उन्होंने कहा कि अगर ईश्वर में लीन होना है तो हमें बुढ़ापे में भजन करने की जरूरत नहीं है, यह कार्य तो बचपन से ही आरंभ हो जाना चाहिए। संस्कार बचपन से ही मिलना चाहिए।

अगर बचपन में ही आध्यात्मिक संस्कार का बीजारोपण हो जाता है तो धीरे-धीरे यह वृक्ष बनता है, फिर वृक्ष ही वट वृक्ष बनता है और जब उसके फल आते हैं सारे समाज को उसके व्यक्तित्व का लाभ मिलता है। आज के युवाओं को अध्ययन करना चाहिए, अनुशासन का पाठ पढ़ना चाहिए और आत्म संयम बरतना चाहिए। यह समय की आवश्यकता है।

संस्कारहीन नौजवान देश को आगे नहीं बढ़ा सकता है। युवा देश निर्माण में अपनी भूमिका का निर्वहन करें। इसी में समाज का हित है, इसी में में धर्म का भविष्य है और यही भारत का भविष्य भी है।

श्री तोमर ने कहा कि जितने भी परिवर्तन हुए हैं, जितने भी संस्कार स्थापित हुए हैं, आध्यात्मिक और क्रांतिकारी नेताओं ने अपनी भूमिका का निर्वहन किया वह तरुणाई या युवावस्था में किया गया कार्य है।

आदि गुरु शंकराचार्य को देश को एकसूत्र में बांधने के लिए यात्रा पर निकलना या स्वामी विवेकानंद का शिकागो की धर्म संसद में ऐतिहासिक उद्बोधन, दोनों कार्य युवावस्था में ही हुए। 1857 की क्रांति की नेतृत्वकर्ता वीरांगना झांसी की रानी लक्ष्मी बाई हों, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल हों, सुखदेव या राजगुरु हों या अशफाक उल्ला जैसे क्रांतिकारी, सभी ने जब देश के लिए फांसी के फंदे को चूमा तो सभी युवा थे।

हम मानते हैं कि बचपन जानने के लिए है, तरुणाई सीखने के लिए है और युवावस्था काम करने के लिए है।

युवाओं के लिए प्रवचनों का महत्व बताते हुए श्री तोमर ने कहा कि पूज्य भगवान महावीर स्वामी के बताए रास्ते पर चल कर तथा आचार्य विद्यासागर जी के मार्ग दर्शन पर चलकर हम अपने जीवन में ऐसा कार्य करें कि भारत फिर से विश्व गुरु पद पर अलंकृत हो।

जो संप्रदाय और पंथ का है वह उसी क्षेत्र में काम करता है मगर विद्यासागर जी महाराज सभी के थे, वे सभी के हित का कार्य करते थे। आचार्य श्री समयसागर जी महाराज का जीवन एवं मार्गदर्शन हमें संस्कार, सेवा, संयम और राष्ट्रहित की प्रेरणा देता है।

यदि युवा इन आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएँ, तो वे स्वयं का, समाज का और राष्ट्र का उज्ज्वल भविष्य निर्माण कर सकते हैं। तकनीक के उपयोग पर चर्चा करते हुए श्री तोमर ने कहा कि तकनीक के लाभ भी हैं और नुकसान भी हैं।

अगर भोपाल से दूर हैं तो तकनीक का लाभ उठा कर महाराज जी के प्रवचन श्रवण करना चाहिए लेकिन अगर भोपाल में हैं तो महाराज जी के सानिध्य में ही प्रवचन सुनना चाहिए। आज की युवा पीढ़ी को तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व निभाते हुए राष्ट्र और समाज की सेवा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

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