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संस्कृत के संरक्षण का संकल्प, देशभर के संस्कृत विद्वानों का सम्मान

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 23 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
संस्कृत के संरक्षण का संकल्प, देशभर के संस्कृत विद्वानों का सम्मान

डीडवाना-कुचामन जिले के जसवंतगढ़ में अखिल भारतीय कुलपति सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में संस्कृत के संरक्षण,आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और भारतीय संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।

23 अक्तूबर,दौसा। संस्कृत को भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा का आधार माना जाता है, लेकिन बदलते दौर में इस प्राचीन भाषा को नई पीढ़ी से जोड़ना एक बड़ी चुनौती है। इसी उद्देश्य से डीडवाना-कुचामन जिले के जसवंतगढ़ में अखिल भारतीय कुलपति सम्मान समारोह आयोजित किया गया। भामाशाह एवं उद्योगपति महावीर प्रसाद तापड़िया के जन्मदिन पर संत प्रखर महाराज के सान्निध्य में हुए इस समारोह में देशभर के संस्कृत विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से जुड़े कुलपति, प्रोफेसर और विद्वान शामिल हुए। समारोह में संस्कृत के संरक्षण, आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और भारतीय संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।

आधुनिक दौर में संस्कृत विद्या के प्रति घटते रुझान के बीच भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने और संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से डीडवाना - कुचामन जिले में। जिले के जसवंतगढ़ में अखिल भारतीय कुलपति सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में देश के विभिन्न संस्कृत विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से जुड़े विद्वान एक मंच पर जुटे।

इस दौरान शिक्षा,संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को कुलपति शिरोमणि, कुलपति विभूषण, कुलपति रत्न, कुलपति मार्तंड और कुलपति शिक्षा भूषण सहित विभिन्न अलंकरणों से सम्मानित किया गया। आयोजन समिति प्रमुख एवं सूरजमल तापड़िया संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य हेमंत कृष्ण शर्मा ने कहा कि समारोह का उद्देश्य आज के दौर में कम होती जा रही संस्कृत विद्या को पुनर्जीवित करना और इसे जन-जन तक पहुंचाना है।

समारोह में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रोफेसर मुरली मनोहर पाठक को कुलगुरु शिरोमणि सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्होंने संस्कृत को भारतीय संस्कृति का आधार बताते हुए इसके अध्ययन को आवश्यक कहा। साथ ही आयोजक तापड़िया परिवार के समाज सेवा और मानवता से जुड़े कार्यों की सराहना की।

समारोह में संस्कृत के संरक्षण के साथ इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के व्यावहारिक प्रयासों पर भी चर्चा हुई। विद्वानों ने शिक्षा, जनजागरूकता और आधुनिक तकनीक के जरिए संस्कृत को आमजन से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसी क्रम में राजस्थान संस्कृत अकादमी की निदेशक डॉ. लता श्रीमाली ने अकादमी की ओर से चलाए जा रहे अभियानों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि ‘एक कदम भारतीय संस्कृति की ओर’ अभियान के तहत युवा शक्ति और जेन-जी को पूजा-अर्चना की पद्धतियों तथा भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं की जानकारी दी जा रही है। प्रदेशभर में अब तक 30 से अधिक शिविर लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा विभिन्न वेद विद्यालयों में ज्योतिष विशेषज्ञ लगाए गए हैं और प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं संवर्धन का काम भी किया जा रहा है।

संस्कृत के प्रचार-प्रसार में आधुनिक तकनीक की भूमिका पर कुलगुरु रत्न पुरस्कार से सम्मानित प्रोफेसर मदन मोहन झा ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि संस्कृत और शास्त्रों से संबंधित 50 से अधिक एंड्रॉयड एप बनाए जा चुके हैं। इनके माध्यम से लोग संस्कृत सीखने के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ा ज्ञान भी हासिल कर रहे हैं।

समारोह में संस्कृत के महत्व, भारतीयता और नई शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका पर भी विचार रखे गए। वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत का अध्ययन केवल भाषा सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, दर्शन और सांस्कृतिक विरासत को भी समझा जा सकता है। कुलगुरु विभूषण पुरस्कार से सम्मानित हरिद्वार के प्रोफेसर रमाकांत पांडे ने संस्कृत को भारत की पहचान बताते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद के विषय का अध्ययन करने के साथ भारतीयता को समझने के लिए संस्कृत भी पढ़नी चाहिए।

उन्होंने नई शिक्षा नीति में प्राथमिक स्तर से विश्वविद्यालय स्तर तक भारतीय ज्ञान परंपरा को शामिल किए जाने को नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

जसवंतगढ़ में आयोजित इस समारोह में संस्कृत विद्या के संरक्षण, विद्वानों के सम्मान और भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने संस्कृत को शिक्षा, आधुनिक तकनीक और सामाजिक जीवन से जोड़कर इसके व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया।समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले अन्य विद्वानों को भी सम्मानित किया गया।

प्रोफेसर शिवशंकर मिश्र को कुलगुरु मार्तंड पुरस्कार, प्रोफेसर सुरेश कुमार अग्रवाल को कुलपति शिक्षा भूषण पुरस्कार, प्रोफेसर धनंजय पांडे को शिक्षा मनीषी पुरस्कार, प्रोफेसर दामोदर शास्त्री को ज्ञान वारिधि पुरस्कार, प्रोफेसर विष्णु कांत पांडे को ज्ञान भास्कर पुरस्कार, डॉ. नरोत्तम पुजारी को ज्योतिष भूषण पुरस्कार और प्रोफेसर इंद्र सिंह को ज्ञान भूषण पुरस्कार प्रदान किया गया।

बाइट 01: हेमंत कृष्ण शर्मा आयोजन समिति प्रमुख एवं प्राचार्य, सूरजमल तापड़िया संस्कृत महाविद्यालय।

बाइट 02: प्रोफेसर मुरली मनोहर पाठक कुलपति, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली।

बाइट 03: डॉ. लता श्रीमाली निदेशक, राजस्थान संस्कृत अकादमी।

बाइट 04: प्रोफेसर मदन मोहन झा ( कुलपति रत्न पुरस्कार से सम्मानित)

बाइट 05: प्रोफेसर रमाकांत पांडे ( कुलपति विभूषण पुरस्कार से सम्मानित)

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।