सरदारपुर में CEC के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन:ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा, तहसीलदार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →धार जिले के सरदारपुर में मंगलवार को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। विधायक प्रताप ग्रेवाल के निर्देश पर सौंपा गया यह ज्ञापन नायब तहसीलदार प्रशस्तिसिंह जमरा को दिया गया। कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर कार्रवाई की मांग की।
स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव पर जताई चिंता कांग्रेस ने ज्ञापन में कहा कि भारतीय लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की महत्वपूर्ण भूमिका है। निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसकी निष्पक्षता और विश्वसनीयता लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है। आयोग की जिम्मेदारी है कि चुनाव प्रक्रिया में आम जनता का विश्वास बना रहे।
ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों पर निष्पक्षता से विचार करने की मांग की गई। कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग भी की। ये कार्यकर्ता रहे मौजूद ज्ञापन का वाचन नगर परिषद उपाध्यक्ष शैलेंद्र चौहान ने किया।
इस दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रतनलाल पडियार, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष ब्रजेश ग्रेवाल, पार्षद संजय जायसवाल, राजगढ़ शहर कांग्रेस अध्यक्ष जीवनसिंह सिसौदिया, विरसन भगत, दिनेश चौधरी पिपरनी, केकडिया डामोर, शिवांग ग्रेवाल, मुकेश तुफान, समन्दरसिंह बामनिया, अरविन्द जाट, लक्ष्मण काग, सुरेश डोडियार, बलदेव मकवाना, मदन वसुनिया, अकरम भूरिया, करण डामोर, महेश डामोर, लखन परमार, दिलीप भूरिया, राजेश गुण्डिया और शैतान मेडा सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
📡 स्रोत: NewsData.io
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर सरदारपुर में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के संदर्भ में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपने की घटना पर आधारित है। यह विषय चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर उठे सवालों को उजागर करता है। खबर का महत्व इस बात में है कि यह चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कांग्रेस की आलोचना को दर्शाता है, जिससे चुनावी व्यवस्था पर विश्वास पर असर पड़ सकता है। आम जनता पर इसका प्रभाव चुनावों में भागीदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और चुनावी प्रक्रियाओं में