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सरकारी जमीन पर ‘हल चलाओ-कब्जा पाओ’ का खेल:सरपंच पति ने ट्रैक्टर चलाया,ग्रामीणों ने खुद ही बांट ली 40 एकड़ जमीन

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 20 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
सरकारी जमीन पर ‘हल चलाओ-कब्जा पाओ’ का खेल:सरपंच पति ने ट्रैक्टर चलाया,ग्रामीणों ने खुद ही बांट ली 40 एकड़ जमीन

सरगुजा जिले के मैनपाट में सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल दोबारा शुरु हो गया है। यहां वन भूमि और छोटे झाड़ के जंगल संकट में हैं। ताजा मामला कुनिया ग्राम पंचायत के असकरा गांव का है। यहां सरपंच बिंदु टोप्पो के पति विनोद टोप्पो ने दबंगई करते हुए करीब 32 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन पर कब्जा करने ट्रैक्टर से जुताई कर दी है।

सरपंच पति की देखा-देखी गांव के करीब 25 से अधिक ग्रामीणों ने एक साथ बैल और ट्रैक्टर से 40 एकड़ से अधिक की जमीन को एक ही दिन में जोत दिया और आपस में ही सरकारी जमीन का बंटवारा कर लिया है। बंटवारे में विवाद होने पर कुछ ग्रामीणों ने इसकी शिकायत हल्का नंबर-7 के पटवारी से कर दी। मौके पर पहुंचे पटवारी ने जुताई बंद कराई है, लेकिन ग्रामीण चुप-चाप फिर से जुताई कर जमीन कब्जा करने की फिराक में हैं।

दरअसल राजस्व रिकार्ड का खबरा नंबर-143 छोटे झाड़ का जंगल है, जो कि मुख्य इलाके में है। इसीलिए ग्रामीणों ने यहां कब्जा कर छोटे झाड़ का जंगल दिखाकर वन अधिकार पट्‌टा बनवाने की होड़ में छोटे-बड़े पेड़-पौधों को काट दिया है। प्रदेश के शिमला में जमीन का रेट हाई, इसीलिए चल रहा कब्जे का खेल जब ग्रामीणों में जमीन कब्जे को लेकर विवाद हुआ तो इसकी शिकायत पटवारी के साथ तहसीलदार से भी की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पटवारी मौके पर पहुंचा और अब से जमीन कब्जा नहीं करने को लेकर पंचनामा भी तैयार कराया, लेकिन फिर से ग्रामीण कब्जा करने के लिए गुपचुप तरीके से वहां घेराबंदी कर रहे हैं। बता दें मैनपाट प्रदेश का शिमला है इसीलिए वहां जमीन का रेट काफी अधिक है, रिजार्ट के साथ होटल बनाने के लिए वहां बड़ी मात्रा में जमीन की खरीदी बिक्री हो रही है, इसीलिए वहां जमीन कब्जे का खेल चल रहा है।

मैनपाट की इन जगहों पर भी बड़े पैमाने पर कब्जा 1.

मैनपाट के ग्राम पंचायत परपटिया में करीब सात साल पहले गांव के ही ग्रामीणों ने करीब 250 एकड़ से अधिक जमीन पर कब्जा कर लिया है। छोटे छोटे जगहों पर कब्जे का खेल सालों से चला आ रहा है। बीच में बॉक्साइट खदान खुलवाने के लिए प्रशासन ने कब्जा हटाने का काम भी शुरु किया, लेकिन विरोध के बाद कब्जा हटाने का काम बंद है। समस्या है कि प्रशासन की टीम गरीबों का घर उजाड़ने लगी थी। जबकि कई दबंग बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन पर कब्जा जमाए हुए हैं। 2.

इसके अलावा मैनपाट के डांडकेसरा में भी पांच साल पहले बड़ी मात्रा में ग्रामीणों ने वन विभाग की जमीन पर कब्जा कर लिया था, कई लोगों के घरों को भी तोड़ा गया, लेकिन अभी भी सैकड़ों लोगों के कब्जे में वन विभाग की जमीन है। वहीं इलाके के ललेया और सरभंजा के साथ पूरे मैनपाट इलाके में ही अवैध तरीके से लोगों ने जमीन कब्जा किया है।

जमीन कब्जे के खेल में राजनीतिक दलों के लोग भी शामिल हैं, इसीलिए अफसर भी कार्रवाई से बचते हैं। शिकायत मिली है, कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है सरकारी जमीन पर कब्जा करने की शिकायत मिली है, सरपंच के पति को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। पहले सरपंच पति ने ही जमीन पर हल चलाया था, इसके बाद दूसरे ग्रामीणों ने भी वहां जुताई की।

पटवारी को भी मौके पर भेजा था। कब्जा करने वालों पर कार्रवाई कर रहे हैं, ताकि आगे से इस प्रकार कोई भी व्यक्ति सरकारी जमीन पर कब्जा न कर पाए। पंचनामा भी तैयार किया गया है, जैसा जवाब मिलता है उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे। - उमेश बाज, तहसीलदार, मैनपाट

📡 स्रोत: NewsData.io

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