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सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इलाज की व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त:इलाज सुधारने का रोडमैप बनाए सरकार, नवजात की मौत पर मुआवजे का जवाब मांगा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 17 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इलाज की व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त:इलाज सुधारने का रोडमैप बनाए सरकार, नवजात की मौत पर मुआवजे का जवाब मांगा

प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इलाज की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार को व्यापक रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि इसमें नवजात शिशुओं और बच्चों के उपचार के साथ अन्य मरीजों के लिए भी जरूरी चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था शामिल की जाए।

पर्याप्त संख्या में वेंटिलेटर उपलब्ध कराने की योजना बनाए नवजात और बाल चिकित्सा गहन चिकित्सा इकाइयों (एनएनआईसीयू और पीआईसीयू) को बेहतर बनाने के अलावा पर्याप्त संख्या में वेंटिलेटर और विशेष वेंटिलेटर उपलब्ध कराने की योजना भी बनाई जाए। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने आशुतोष कुमार सिंह की ओर से दाखिल जनहित याचिका समेत अन्य याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया।

मरीजों के बेहतर उपचार की व्यवस्था बने अदालत ने कहा कि प्रदेश के 45 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा सुविधाओं के विकास के लिए संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) और किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) जैसे विशेषज्ञ संस्थानों से सुझाव लिए जाएं। इनके आधार पर ऐसा रोडमैप तैयार किया जाए, जिससे मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

परियोजना के परिणामों की समीक्षा की योजना मामले में सुनवाई के समय राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को बताया गया कि इटावा, औरैया, कन्नौज, मैनपुरी और फिरोजाबाद में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर ई-सारथी डिजिटल रेफरल प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है। इसके तहत सैफई स्थित मेडिकल कॉलेज को रेफरल अस्पताल बनाया गया है।

इस परियोजना के परिणामों की समीक्षा और जरूरी संशोधनों के बाद इसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू करने की योजना है। अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी न्यायालय ने सुल्तानपुर के राजकीय स्वायत्त मेडिकल कॉलेज में जन्मे एक नवजात की मौत के मामले में भी राज्य सरकार से जवाब मांगा है। आरोप है कि बच्चे को समय पर वेंटिलेटर, ऑक्सीजन और विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं हो सके, जिसके कारण उसकी मौत हो गई।

कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर नवजात को खोने वाले परिवार को मुआवजा क्यों न दिया जाए। मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी।

📡 स्रोत: NewsData.io

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