सरकारी राशन के रिकॉर्ड में हेराफेरी, यूपी में 60 लाख का गेहूं गायब
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उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले से सरकारी गेहूं के स्टॉक में एक बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है.
जांच के दौरान दो सरकारी खरीद केंद्रों के गोदाम में रिकॉर्ड से करीब 228.764 मीट्रिक टन गेहूं का स्टॉक गायब पाया गया, जिसकी कीमत करीब 60 लाख रुपये बताई जा रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक, 11 सितंबर को अधिकारियों की टीम ने दोनों खरीद केंद्रों पर अचानक जांच की थी.
इस दौरान डॉक्युमेंट्स में दर्ज गेहूं की मात्रा और गोदाम में मौजूद स्टॉक का मिलान किया गया, जिसमें रिकॉर्ड के मुकाबले बड़ी मात्रा में गेहूं कम पाया गया.
पहले खरीद केंद्र पर कितना गेहूं गायब मिला?
जांच के दौरान पहले केंद्र के रिकॉर्ड में पता चला कि साल 2026-27 में यहां करीब 420.87 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था.
इसमें से 353.759 मीट्रिक टन गेहूं भारतीय खाद्य निगम (FCI) को भेज दिया गया था.
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रिकॉर्ड के मुताबिक इसके बाद 67.111 मीट्रिक टन गेहूं गोदाम में बचा होना चाहिए था. लेकिन निरक्षण के दौरान टीम को गोदाम की चाबी नहीं दी गई.
पुलिस के मुताबिक, खिड़की से अंदर देखने पर गोदाम खाली नजर आया.
दूसरे केंद्र पर भी नहीं मिला पूरा स्टॉक
दूसरे खरीद केंद्र के डॉक्युमेंट्स की जांच में भी स्टॉक को लेकर बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. रिकॉर्ड के मुताबिक यहां कुल 322.600 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था.
इसमें से 160.947 मीट्रिक टन गेहूं FCI को भेजा गया था.
इसके बाद बाकी का 161.653 मीट्रिक टन गेहूं गोदाम में मौजूद होना चाहिए था, लेकिन जांच के दौरान टीम को वहां भी गेहूं का कोई भोटिक स्टॉक नहीं मिला.
यानी दोनों केंद्रों को मिलाकर गायब गेहूं की कुल मात्रा 228.764 मीट्रिक टन बताई गई है.
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📡 स्रोत: ABP Live Vyapar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में सरकारी गेहूं के स्टॉक में लगभग 228.764 मीट्रिक टन की गड़बड़ी पाई गई, जिसकी कीमत लगभग 60 लाख रुपये है। यह घटना 11 सितंबर को अधिकारियों की टीम द्वारा दोनों खरीद केंद्रों पर की गई अचानक जांच में सामने आई। यह विषय सरकारी राशन प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाता है। इस खबर का महत्व इसलिए है क्योंकि यह सरकारी स्टॉक में संभावित कदाचार को उजागर करती है, जिससे सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि र