सरस मेला में महिला उद्यमिता का जलवा, 3 दिन में 68.56 लाख का कारोबार
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सरस मेला में महिला उद्यमिता का जलवा, 3 दिन में 68.56 लाख का कारोबार
पटना के सरस मेले में 15 राज्यों की महिलाएं उत्पाद बेच रही हैं। बायर-सेलर मीट से ब्रांडिंग और बाजार विस्तार पर जोर दिया जा रहा है।
24 सितंबर , पटना (पटना, बिहार) : ज्ञान भवन, पटना में आयोजित बिहार सरस मेला ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की बदलती तस्वीर प्रस्तुत कर रहा है। मेले में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अपने पारंपरिक हस्तशिल्प, लोककला, खाद्य उत्पादों और व्यंजनों के माध्यम से अपनी प्रतिभा और उद्यमशीलता का प्रदर्शन कर रही हैं।
ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) की ओर से आयोजित यह मेला 29 सितंबर 2026 तक चलेगा। मेले में 15 राज्यों के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं 135 से अधिक स्टॉलों के माध्यम से अपने-अपने राज्यों के पारंपरिक उत्पाद, शिल्प, कलाकृतियां, संस्कृति, खान-पान और स्थानीय व्यंजन प्रदर्शित कर रही हैं।
मेले में खरीदारी के साथ आगंतुकों को विभिन्न राज्यों की लोक परंपराओं, हस्तशिल्प और देशज उत्पादों को करीब से जानने का अवसर भी मिल रहा है। आयोजन को लेकर लोगों में लगातार उत्साह देखा जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, मेले के तीसरे दिन 25.37 लाख रुपये से अधिक के उत्पादों और व्यंजनों की बिक्री हुई। वहीं, पहले तीन दिनों में कुल कारोबार 68.56 लाख रुपये से अधिक पहुंच गया।
बायर-सेलर मीट से बाजार विस्तार पर जोर
सरस मेला में केवल उत्पादों की बिक्री पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा है, बल्कि उत्पादों की गुणवत्ता, उचित मूल्य निर्धारण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, विपणन और बाजार विस्तार पर भी चर्चा हो रही है। इसी उद्देश्य से प्रतिदिन क्रेता-विक्रेता (बायर-सेलर मीट) संवाद आयोजित किया जा रहा है।
इसी क्रम में बुधवार को सरस मेला परिसर के सभागार में जीविका और अर्न्स्ट एंड यंग के संयुक्त तत्वावधान में बायर-सेलर मीट का आयोजन किया गया। संवाद में बिहार के पारंपरिक उत्पादों—भुंजा, सत्तू, आटा, मखाना, मेज, मक्का, चायपत्ती, प्रोटीन बार और हस्तशिल्प—की गुणवत्ता में सुधार, उचित मूल्य निर्धारण, ब्रांडिंग और विपणन की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम में उत्पादक दीदियों के साथ सत्तुज, एनसीडीईएक्स लिमिटेड, एफपीसी और प्लेटफार्म इंडिया प्राइवेट लिमिटेड सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। क्रेताओं ने उत्पादों को व्यापक राष्ट्रीय बाजार और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए सुझाव दिए। इससे ग्रामीण उत्पादकों को नए बाजार और विपणन के अवसर मिलने की संभावना है।
अमृता देवी की सफलता बनी आकर्षण
मेले में खादी और कॉटन के परिधानों की भी अच्छी मांग देखने को मिल रही है। भागलपुर जिले के खरीक प्रखंड से आईं अमृता देवी इसका उदाहरण हैं। आयोजकों के अनुसार, उन्होंने मेले के शुरुआती तीन दिनों में ढाई लाख रुपये से अधिक के कॉटन और खादी के कपड़ों की बिक्री की है।
अमृता देवी वर्ष 2018 से चंदा जीविका महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। उन्होंने जीविका के प्रोत्साहन और समूह से मिले ऋण के माध्यम से छोटे स्तर पर कॉटन एवं खादी के कपड़ों का कारोबार शुरू किया था। मेहनत और अनुभव के बल पर उन्होंने आगे चलकर अपनी मिनी फैक्ट्री स्थापित की। इसमें 24 से अधिक जीविका दीदियों और उनके परिजनों को रोजगार मिलने की जानकारी दी गई है।
बिहार सरस मेला ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ उनके कौशल, उद्यमिता और आर्थिक आत्मनिर्भरता को सामने लाने का मंच बन रहा है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को उत्पादन, प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और बाजार से जोड़ने की प्रक्रिया ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी को मजबूत कर रही है।
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Caption : पटना के सरस मेले में 15 राज्यों की महिलाएं उत्पाद बेच रही हैं। बायर-सेलर मीट से ब्रांडिंग और बाजार विस्तार पर जोर दिया जा रहा है।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
सरस मेला में महिला उद्यमिता का जलवा, 3 दिन में 68.56 लाख का कारोबार विषय है कि बिहार के ग्रामीण इलाकों की महिलाएँ अपने हस्तशिल्प और उत्पादों को बड़े पैमाने पर बेचकर आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण प्राप्त कर रही हैं। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाती है कि सरकारी और गैर‑सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को उद्यमिता के अवसर मिल रहे हैं और वे अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर रही हैं। आम जनता पर इसका असर यह है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, गरीबी घटेगी और सामाजिक-