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'सरासर गलत...', राहुल गांधी के UPI चार्ज को लेकर सवाल का सरकार ने दिया जवाब

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 16 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
'सरासर गलत...', राहुल गांधी के UPI चार्ज को लेकर सवाल का सरकार ने दिया जवाब

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के UPI लेनदेन पर फीस वसूलने को लेकर लगाए आरोपों का NPCI ने जवाब दिया है. राहुल ने दावा किया था कि दो हजार से ज्यादा के यूपीआई लेनदेन पर फीस लगाने का रास्ता खोल दिया गया है.

उन्होंने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि इस तरह के लेनदेन की संख्या भले ही करीब 5 प्रतिशत हो, लेकिन यूपीआई के कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी करीब 65 फीसदी है.

इसके जवाब में NPCI ने साफ किया है कि UPI में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू सभी UPI लेन-देन की कुल वैल्यू का 70 फीसदी है.

इस तरह के आपसी लेन-देन पर कोई भी चार्ज नहीं लगेगा, चाहे कितना भी पैसा ट्रांसफर किया जाए.

इसके अलावा, मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR सभी दुकानदारों-व्यापारियों को मिलने वाले पेमेंट (P2M) पर पूरी तरह से नहीं थोपा जाएगा, बल्कि इसके लिए एक लिमिट तय की गई है.

केवल 2000 से ज्यादा के मर्चेंट लेन-देन पर ही मामूली MDR चार्ज लिया जाएगा.

NPCI के मुताबिक, अकेले अगस्त 2026 में UPI ने 24.5 बिलियन ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए हैं.

जैसे-जैसे पेमेंट का यह पूरा स्ट्रक्चर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इसके टेक्निकल नेटवर्क, नए बदलावों, साइबर सुरक्षा और कस्टमर सपोर्ट में निवेश करना बेहद जरूरी होता जा रहा है.

MDR के इस नए नियम को इसी बड़े उद्देश्य के साथ देखा जाना चाहिए, ताकि भारत का डिजिटल पेमेंट ढांचा सुरक्षित, मजबूत, प्रतिस्पर्धी और देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के काबिल बना रहे.

दावा - राहुल गांधी ने सवाल किया था कि सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फीस नहीं ली जाएगी, लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फीस आखिर आएगी कहां से?

कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से?

जवाब - इसके जवाब में सीधे तौर पर कहा गया है कि इस दावे का कोई आधार नहीं है कि नए MDR नियम के चलते दुकानदार अपने सामान की कीमतें बढ़ा देंगे.

पुराने आंकड़े देखें तो व्यापारी पेमेंट लेने पर लगने वाले चार्ज को अपने बिजनेस का एक सामान्य खर्च मानते हैं.

इसकी भरपाई

📡 स्रोत: ABP Live

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

राहुल गांधी ने दावा किया कि UPI लेनदेन पर 2000 रुपये से अधिक के लिए शुल्क लगाया जा रहा है, जिससे नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। सरकार और NPCI ने इन आरोपों का खंडन किया, यह कहते हुए कि ऐसी कोई नीति लागू नहीं है। यह मुद्दा डिजिटल भुगतान के नियमों और पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, क्योंकि लाखों लोग रोज़ाना UPI का उपयोग करते हैं। यदि शुल्क लागू होता, तो छोटे व्यापारियों और आम उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ सकता है, जिससे डिजिटल भुगतान का प्रसार प्रभावित हो सकता है।

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