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सर्किल रेट 83 हजार, PWD दे रहा है 10 हजार:अयोध्या के किसान हाईकोर्ट पहुंचे तो न्यायालय ने अफसरों को फटकार लगाई

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 24 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
सर्किल रेट 83 हजार, PWD दे रहा है 10 हजार:अयोध्या के किसान हाईकोर्ट पहुंचे तो न्यायालय ने अफसरों को फटकार लगाई

अयोध्या में 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण के नाम पर PWD निर्माण खंड-3 अयोध्या की मनमानी का बड़ा खुलासा हुआ है। परिक्रमा मार्ग स्थित मंगल पांडे चौराहे पर गाटा संख्या 676 में स्थित मौर्य मिष्ठान एवं जलपान भंडार की 134.55 वर्ग मीटर कमर्शियल जमीन का बाजार मूल्य वर्तमान सर्किल दर से लगभग सवा दो करोड़ रुपये बैठता है।

इसके बावजूद लेकिन PWD के अधिकारी भू-स्वामी ओम प्रकाश मौर्य व अन्य पुत्रगण राम निहोर मौर्य, निवासी कूड़ा केशवपुर को मात्र 10 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर यानी कुल 14 लाख रुपये में बैनामा करने का दबाव बना रहे हैं। भू-स्वामियों का आरोप है कि उनकी जमीन अयोध्या-आजमगढ़ मार्ग और 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के जंक्शन पॉइंट पर कॉर्नर की कमर्शियल जमीन है, जो आबादी क्षेत्र के अंदर है।

नियमानुसार वर्तमान कमर्शियल सर्किल दर 83 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर है और कॉर्नर व आबादी होने के कारण 40% अतिरिक्त जोड़कर उसका दो गुना मूल्यांकन यानी लगभग 1,26,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर मिलना चाहिए। 100% सॉलेशियम और 74.86 वर्ग मीटर में बने पक्के व्यावसायिक भवन का अलग से मुआवजा जोड़ने पर कुल मुआवजा सवा दो करोड़ से अधिक होता है।

लेकिन PWD अधिकारी जिला स्तरीय समिति की पुरानी दर का हवाला देकर 10 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर पर सहमति के लिए लगातार दबाव बना रहे थे। परेशान होकर भू-स्वामियों ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने लगाई फटकार इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ पीठ के कोर्ट नंबर 1 में न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला ने रिट-सी संख्या 9787/2026 में 10 सितंबर 2026 को कड़ा आदेश दिया।

कोर्ट ने कहा - "विपक्षी याचिकाकर्ताओं पर जमीन बेचने का कोई दबाव नहीं डालेंगे। यह उनकी मर्जी है कि बेचें या न बेचें। बिना कानूनी अधिग्रहण के कोई हस्तक्षेप किया तो गंभीर परिणाम होंगे।" याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रदीप कुमार मिश्रा ने की पुष्टि इस प्रकरण की पुष्टि करते हुए बताया माननीय उच्च न्यायालय इलाहबाद खण्ड पीठ लखनऊ मे कोर्ट के समक्ष ओम प्रकाश मौर्य व अन्य बनाम राज्य वआदि का पक्ष प्रस्तुत कर रहे थे।

याची के अधिवक्ता मिश्रा ने बताया कि कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जमीन सार्वजनिक उद्देश्य के लिए चाहिए तो उसे भूमि अर्जन कानून 2013 के तहत अनिवार्य रूप से अधिग्रहित कर उचित मुआवजा दिया जाए, लेकिन बिना अधिग्रहण के कोई दबाव नहीं बनाया जा सकता।

📡 स्रोत: NewsData.io

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