सस्ती हुई प्याज, सरकार ने उतारे 467 ट्रक्स और 8 ट्रेन, कितने में मिल रही 1 किलो?
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ईरान और यूएस का युद्ध जब से शुरू हुआ था, तभी से देश में महंगाई ने पैर पसारना शुरू कर लिया था.
बरसात का मौसम आते ही प्याज की कीमतों ने भी लोगों को रुलाना शुरू कर दिया था.
लेकिन अब कहीं जाकर जनता को थोड़ी राहत मिलना शुरू हुई है.
वो इसलिए क्योंकि केंद्र सरकार ने बाजार में प्याज की सप्लाई बढ़ाने का फैसला किया है.
सरकार अपने पास रखे प्याज के स्टॉक को बाजार में भेज रही है, ताकि कीमतों पर दबाव कम हो और लोगों को प्याज सही दाम पर मिल सके.
सरकार ने प्याज को अलग-अलग शहरों तक पहुंचाने के लिए ट्रकों के साथ 'कांदा एक्सप्रेस' नाम की स्पेशल ट्रेनों का भी इस्तेमाल शुरू किया है.
'कांदा एक्सप्रेस' से भी पहुंचाई जा रही प्याज
सरकार ने अपने बफर स्टॉक से अब तक 2 लाख क्विंटल से ज्यादा प्याज बाजारों तक भेजा है.
इसके लिए 8 'कांदा एक्सप्रेस' ट्रेनें और 467 ट्रकों का इस्तेमाल किया गया है. इनसे प्याज 123 शहरों तक पहुंचाया गया है.
त्यौहारों को देखते हुए सरकार आगे भी एक्स्ट्रा ट्रेनें चलाने की तैयारी कर रही है, ताकि ज्यादा खपत वाले शहरों में प्याज की सप्लाई लगातार बनी रहे और लोगों को पर्याप्त मात्रा में प्याज मिलता रहे.
मंडियों में घटे प्याज के दाम
सरकार की इस स्ट्रैटेजी का असर प्याजी की कीमतों में भी देखने को मिल रहा है.
प्याज की आवक बढ़ने से अब मंडियों में प्याज की कीमतें कम होती दिख रही हैं.
महाराष्ट्र में प्याज का औसत मंडी भाव 16 सितंबर को करीब 4,030 रुपये प्रति क्विंटल था, जो 3 अक्टूबर को घटकर करीब 3,475 रुपये प्रति क्विंटल रह गया. यानी इसमें लगभग 13% की गिरावट आई है.
इन शहरों में सस्ती हुई प्याज
प्याज के दाम सिर्फ मंडियों में ही नहीं, बल्कि खुदरा बाजार में भी कम हुए हैं.
पिछले दो हफ्तों में देश के 126 शहरों में प्याज की कीमत 1 से 21 रुपये प्रति किलो तक कम हुई है.
तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगा
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
प्याज की कीमतों में गिरावट के पीछे सरकार का कदम है। 467 ट्रक और 8 ट्रेनों के जरिए स्टॉक बाजार में उतारा गया, जिससे 1 किलो प्याज का दाम घटकर 30 रुपये के आसपास हो गया। यह कदम महंगाई के बढ़ते दौर में, खासकर ईरान-यूएस युद्ध से उत्पन्न आर्थिक दबाव के बीच, जनता को राहत देने के लिए उठाया गया। कीमतों में यह गिरावट किसानों को बेहतर आय और उपभोक्ताओं को सस्ती दवाइयों के रूप में लाभ देती है। सामान्य जनता के लिए यह रोज़मर्रा की ज़रूरतों में किफ़ायत और आर्थिक स्थिरता का संकेत है।