अपराध

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे पर दिल्ली HC का कड़ा रुख

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 12 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे पर दिल्ली HC का कड़ा रुख

सितंबर 07, नई दिल्ली: सत्य निकेतन इमारत हादसे पर दिल्ली हाई कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस हादसे ने दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य कॉलेजों के हॉस्टल की कमी को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। हाई कोर्ट ने कहा कि हादसे की जिम्मेदारी सिर्फ इमारत के मालिक की नहीं, बल्कि दिल्ली विश्वविद्यालय और MCD भी बराबर जिम्मेदार हैं।

कोर्ट ने MCD से PG और हॉस्टल के नियमन को लेकर मौजूद नियमों की जानकारी मांगी है।कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय से यह भी पूछा है कि बाहर से आने वाले छात्रों के लिए DU और सरकार की ओर से कितने हॉस्टल उपलब्ध हैं। वहीं, MCD को यह बताने के निर्देश दिए गए हैं कि हादसे वाली इमारत सभी जरूरी मंजूरियों के साथ बनी थी या नहीं।

इसके साथ ही हाई कोर्ट ने MCD से सभी PG हॉस्टल की इमारतों की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है और पूछा है कि ये इमारतें कानूनी नियमों के तहत बनी हैं या नहीं। अदालत ने सभी संबंधित विभागों को 10 दिन के भीतर हलफनामा दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि MCD की जिम्मेदारी बनती है कि हर बिल्डिंग का निर्माण, मरम्मत नियमों के मुताबिक हो।

हाई कोर्ट ने कहा कि अगर ऑथरिटी ने जिम्मेदारी से काम किया होता है, तो शायद यह हादसा नहीं होता।

फोटो- दिल्ली हाईकोर्ट (फाइल फोटो)

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।