सायरा बानो बर्थडे स्पेशल, एक्ट्रेस को साड़ी में देखते ही दिल दे बैठें थे दिलीप कुमार

हिंदी सिनेमा में पर्दे पर अपनी अदाकारी और खूबसूरती से दर्शकों का दिल जीतने वाली सायरा बानो असल जिंदगी में बचपन से ही दिलीप कुमार की दीवानी थीं. एक बार सायरा के बर्थडे पर उनकी मां के बुलाने पर दिलीप कुमार भी पार्टी में पहुंचे, साड़ी पहने सायरा को देखकर दिलीप कुमार की नजर ठहर गईं.
दिलीप कुमार ने पहली बार उन्हें एक खूबसूरत महिला के रूप में नोटिस किया और यहीं से दोनों की प्रेम कहानी ने नया मोड़ ले लिया. 12 साल की उम्र से देखती थीं दिलीप कुमार से शादी का सपना 23 अगस्त 1944 को मसूरी में जन्मीं सायरा बानो फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखती थीं.
उनकी मां नसीम बानो अपने दौर की मशहूर अभिनेत्री थीं. सायरा ने कम उम्र से ही फिल्मी दुनिया में कदम रखने की तयारी शुरू कर दी थी . उन्होंने कथक और भरतनाट्यम जैसे शास्त्रीय नृत्य सीखे और बाद में हिंदी सिनेमा में कदम रखा. साल 1961 में फिल्म 'जंगली' से उनका फिल्मी सफर शुरू हुआ.
शम्मी कपूर के साथ उनकी यह फिल्म सुपरहिट रही और सायरा देखते ही देखते स्टार बन गईं. लेकिन सायरा के दिल में बचपन से ही एक अलग ही सपना पल रहा था. वह दिलीप कुमार की बहुत बड़ी प्रशंसक थीं.
बताया जाता है कि जब वह करीब 12 साल की थीं, तब एक दिन दिलीप कुमार की फिल्म देखते हुए उन्होंने अपनी मां से कह दिया था कि वह बड़ी होकर दिलीप साहब से शादी करेंगी. मां ने उनकी बात को बचपन का सपना समझकर हंसते हुए टाल दिया. लेकिन किसे पता था कि यह मासूम-सी बात एक दिन सच हो जाएगी. दिलीप कुमार के लिए सीखा सितार
सायरा जब लंदन में पढ़ रही थीं, तब वह दिलीप कुमार के बारे में सपने देखा करती थीं . उनका सपना था कि वह एक दिन 'मिसेज दिलीप कुमार' बनें. यहां तक कि उन्होंने दिलीप कुमार की पसंद और शौक को जानने की कोशिश की. जब उन्हें पता चला कि दिलीप साहब को सितार का शौक है, तो उन्होंने भी सितार सीखना शुरू कर दिया.
दिलीप कुमार उर्दू में माहिर थे, इसलिए सायरा ने उर्दू सीखने में भी दिलचस्पी ली.फिर आया वह दिन, जिसने दोनों की जिंदगी की दिशा बदल दी. 23 अगस्त 1966 को सायरा बानो का जन्मदिन था. उनकी मां ने घर पर एक पार्ट
📡 स्रोत: ABP Live Film