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SCO Summit: Shehbaz Sharif ने उठाया Indus Water Treaty मुद्दा, Hague Court के फैसले पर भारत का सख्त Stand

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 2 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
SCO Summit: Shehbaz Sharif ने उठाया Indus Water Treaty मुद्दा, Hague Court के फैसले पर भारत का सख्त Stand

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में सिंधु जल संधि (IWT) का मुद्दा उठाया। उन्होंने पानी को इस क्षेत्र की "जीवन रेखा" बताया और कहा कि इसका इस्तेमाल कभी भी "राजनीतिक फ़ायदे" के लिए हथियार के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए।

SCO के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद को संबोधित करते हुए, शरीफ़ ने पानी को क्षेत्र की "जीवन-धारा" बताया और कहा कि यह लाखों लोगों का जीवन चलाता है, खेती में मदद करता है और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए बहुत ज़रूरी है।

शरीफ़ ने कहा, "पानी का इस्तेमाल हथियार के तौर पर नहीं होने दिया जाएगा।" उन्होंने तर्क दिया कि साझा जल संसाधनों को दबाव बनाने या राजनीतिक फ़ायदा उठाने का ज़रिया नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा हमारे साझा जल संसाधनों को नियंत्रित करने वाली संधियाँ गंभीर और बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ हैं।

ये राजनीतिक सुविधा के मामले नहीं हैं जिन्हें अपनी मर्ज़ी से दरकिनार किया जा सके। इनका अक्षरशः और भावना के अनुरूप, बिना किसी शर्त के पालन किया जाना चाहिए। इसे भी पढ़ें: भारत का बड़ा धमाका, सिंधु नदी पर बनेंगे 36 डैम, हिला पाकिस्तान!

शरीफ़ का यह बयान हेग स्थित 'कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन' के उस फ़ैसले को भारत द्वारा खारिज किए जाने के एक दिन बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि 1960 की सिंधु जल संधि कानूनी रूप से बाध्यकारी है और संधि के तहत विवाद-समाधान तंत्र भारत और पाकिस्तान के बीच मतभेदों की जांच जारी रख सकता है।

नई दिल्ली का कहना है कि ट्रिब्यूनल का गठन "गैर-कानूनी" तरीके से किया गया है और इस मामले पर उसका कोई अधिकार-क्षेत्र नहीं है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने पानी के विवाद को क्षेत्रीय शांति के बड़े मुद्दे से भी जोड़ा और कहा कि दक्षिण एशिया स्थायी शांति के बिना अपनी पूरी क्षमता हासिल नहीं कर सकता।

उन्होंने साझा जल संसाधनों के प्रबंधन के लिए कूटनीति और क्षेत्रीय सहयोग की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। इसे भी पढ़ें: फैसला मंजूर नहीं...

Sovereign Rights का हवाला देकर भारत ने ठुकराया सिंधु जल संधि पर 'Court of Arbitration' का फैसला भारत ने हेग कोर्ट का फ़ैसला मानने से इनकार किया सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ गया है।

अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 लोग मारे गए थे) के बाद भारत ने इस संधि के कामकाज को रोक दिया था, तब से यह मामला रुका हुआ है।

हेग स्थित 'कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन' ने फ़ैसला सुनाया है कि यह संधि कानूनी रूप से बाध्यकारी है और इसके तहत बना विवाद सुलझाने का सिस्टम दोनों देशों के बीच विवादों की जांच जारी रख सकता है। हालांकि, भारत ने इस फ़ैसले को मानने से इनकार कर दिया है।

भारत का कहना है कि उसने न तो 'कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन' को मान्यता दी है, न ही इसकी कार्यवाही में हिस्सा लिया है और न ही वह इसके अधिकार क्षेत्र को स्वीकार करता है। विदेश मंत्रालय ने इस ट्रिब्यूनल को "गैर-कानूनी तरीके से गठित" संस्था बताया है।

मंत्रालय का तर्क है कि इसे सिंधु जल संधि के प्रावधानों का उल्लंघन करके बनाया गया था।

📡 स्रोत: NewsData.io

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

सिंधु जल संधि (IWT) भारत-पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई एक जल साझा करने वाली संधि है, जो दोनों देशों के लिए कृषि, उद्योग और पीने के पानी के लिए महत्वपूर्ण है। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शहबाज़ शरीफ़ ने इस संधि को ‘जीवन रेखा’ के रूप में रेखांकित किया और चेतावनी दी कि इसे राजनीतिक लाभ के लिये हथियार नहीं बनाना चाहिए। यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि IWT पर विवाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा सकता है और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि पान

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