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सेबी ने एमआईआई के नियमों में बदलाव के लिए पेश किया प्रस्ताव

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 9 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
सेबी ने एमआईआई के नियमों में बदलाव के लिए पेश किया प्रस्ताव

बाजार नियामक सेबी ने आज मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस- एमआईआई के लिए नियमों में बदलाव के प्रस्ताव पेश किए हैं। इन प्रस्तावों का उद्देश्य शेयर बाजार एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉर्पोरेशन और डिपॉजिटरी जैसे संस्थानों के शासी बोर्डों में योग्य उम्मीदवारों का दायरा बढ़ाना और प्रमुख प्रबंधन पदों के लिए योग्यता व अनुभव की शर्तों को अधिक स्पष्ट करना है।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने कहा है कि नए प्रस्तावों के तहत बड़े पैमाने पर शेयरधारिता वाली कंपनियों के निदेशक भी कुछ शर्तों के साथ एमआईआई के बोर्ड में शामिल होने के पात्र हो सकेंगे, भले ही उनके समूह की कोई अन्य कंपनी स्टॉक ब्रोकर या क्लियरिंग मेंबर के रूप में काम कर रही हो।

सेबी ने ऐसी कंपनियों को परिभाषित करते हुए प्रस्ताव दिया है कि इनमें किसी भी निजी शेयरधारक की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए, हालांकि सार्वजनिक क्षेत्र के शेयरधारकों को इस सीमा से छूट दी जाएगी। नियामक का मानना है कि इन बदलावों के जरिए मौजूदा कड़े नियमों के कारण योग्य उम्मीदवारों को ढूंढने में आ रही दिक्कतों को दूर किया जा सकेगा और अनुभवी पेशेवर बड़ी संख्या में उपलब्ध होंगे।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (एमआईआई) के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव पेश किया है। यह बदलाव शेयर बाजार एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉर्पोरेशन और डिपॉजिटरी के शासी बोर्डों में योग्य उम्मीदवारों की संख्या बढ़ाने तथा प्रमुख पदों के लिए योग्यता व अनुभव की शर्तें स्पष्ट करने पर केंद्रित है। यह कदम वित्तीय बाजार की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे निवेशकों को बेहतर गवर्नेंस और जोखिम प्रबंधन का भरोसा मिलेगा।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।