सेल्फ हेल्प किताबों से:अपने विश्वासों पर सवाल उठाने का साहस करें
किताबों से जानिए, आखिर क्यों जीवन में हर बहस जीतना जरूरी नहीं? अपनी सोच पर सवाल उठाना भी समझदारी है कई बार हम सच जानना नहीं चाहते, यह साबित करना चाहते हैं कि हम सही हैं। लेकिन सीखने की शुरुआत वहीं होती है, जहां हम अपने विश्वासों पर सवाल उठाने का साहस करते हैं। यह स्वीकारना कमजोरी नहीं कि हम गलत हो सकते हैं।
अपनी गलती पहचानना हमें पहले से समझदार बनाता है। जीवन में हर बहस जीतना जरूरी नहीं। हर बातचीत के बाद हमारी सोच बेहतर हो। (द स्काउट माइंडसेट -जूलिया गैलेक) सफलता की दौड़ में ठहरना भी सीखें हमने सफलता को इतनी तेजी से जोड़ दिया है कि रुकना हमें पीछे हटना लगता है।
हर दिन कुछ नया हासिल करना, अपनी सीमा को आगे बढ़ाना और दूसरों से बेहतर प्रदर्शन करना हमारी पहचान बन गया है। लेकिन कई बार हमें अपनी गति धीमी करनी पड़ती है ताकि हम समझ सकें कि हम किस दिशा में जा रहे हैं।
वास्तविक मजबूती अधिक काम करने में नहीं, लंबे समय तक टिकने की क्षमता में है। (द प्रैक्टिस ऑफ ग्राउंडेडनेस -ब्रैड स्टलबर्ग) सुकून के वास्ते हर काम पूरा करना जरूरी नहीं हम यह मानकर चलते हैं कि एक दिन हमारे पास हर जरूरी काम के लिए पर्याप्त समय होगा। हम सूची बनाते हैं, उसे पूरा करते हैं और फिर अगली सूची तैयार करते हैं।
जीवन में काम कभी पूरी तरह खत्म नहीं होंगे। सुकून के लिए हमें यह चुनना सीखना होगा कि क्या वास्तव में हमारे समय के लायक है। हर अवसर व हर काम को अपनाना जरूरी नहीं है।
कुछ चीजों को छोड़ना सीखें। (फोर थाउजेंड वीक्स -ऑलिवर बर्कमैन) डर बना रहेगा, फिर भी आगे बढ़ना सीखें हम अक्सर खुशी को एक ऐसी मंजिल मान लेते हैं, जहां पहुंचने के बाद डर, चिंता हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे। इस उम्मीद में हम अपनी अप्रिय भावनाओं से लड़ते हैं। लेकिन भावनाओं को जबरदस्ती दबाने की कोशिश उन्हें और मजबूत बनाती है।
महत्वपूर्ण यह है कि इन भावनाओं के बावजूद हम अपने लिए जरूरी कदम उठाएं। साहस का मतलब डर के बावजूद आगे बढ़ते रहना है। (द हैप्पीनेस ट्रैप -रस हैरिस)
📡 स्रोत: NewsData.io