सेना पूरी ड्रोन वॉरफेयर चेन खड़ी करने की तैयारी में:ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली रणनीति; 3 माह के खरीद दस्तावेज दिखा रहे तस्वीर
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना की ड्रोन रणनीति अब सिर्फ आसमान से निगरानी करने वाले यूएवी खरीदने तक सीमित नहीं रही। पिछले 3 माह में जारी कई खरीद दस्तावेज इस रणनीति की बड़ी तस्वीर दिखाते हैं। सेना पूरी ड्रोन वॉरफेयर चेन के लिए उपकरण जुटा रही है। इनमें दूर तक निगरानी, लक्ष्य पहचानने, एफपीवी ड्रोन से हमला या पेलोड गिराने, सैनिकों को ड्रोन की ट्रेनिंग और दुश्मन ड्रोन को खोजकर निष्क्रिय करने तक की क्षमताएं शामिल हैं।
भास्कर ने जुलाई से सितंबर के बीच सामने आए सेना के ड्रोन और काउंटर-ड्रोन संबंधी खरीद प्रस्तावों की पड़ताल की। इनमें सबसे ताजा 9 लो एल्टीट्यूड एरियल थ्रेट रिस्पॉन्स एंड मिटिगेशन सिस्टम की खरीद प्रक्रिया है। इससे ठीक पहले सेना ने 10 इंटीग्रेटेड लॉन्ग रेंज सर्विलांस ड्रोन के लिए टेंडर जारी किया।
सूत्रों के अनुसार एक तरफ सेना लंबी दूरी तक निगरानी वाले ड्रोन चाहती है। वहीं, कम ऊंचाई पर आने वाले हवाई खतरों से निपटने के सिस्टम भी ले रही है। 273 आइटम की लिस्ट, ये ड्रोन्स के लिए जरूरी सेना ने ड्रोन्स के लिए 273 आइटम की एक फेहरिस्त जारी की है। इसमें मोटर, इलेक्ट्रॉनिक स्पीड कंट्रोलर, ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम, फ्लाइट कंट्रोलर, कैमरा और बैटरी के साथ रिमोटली ऑपरेटेड मल्टी-पेलोड रिलीज मैकेनिज्म भी शामिल हैं।
सर्विलांस ड्रोन का काम तस्वीर या वीडियो भेजना है। पेलोड रिलीज मैकेनिज्म ड्रोन को किसी वस्तु को तय जगह पर गिराने की क्षमता देता है। एक्सपर्ट व्यू- स्वदेशी उत्पादन और तेज मरम्मत जरूरी
रक्षा विश्लेषक ब्रिगेडियर (रि.) शरदेंदु का कहना है- ड्रोन युद्ध क्षमता का आकलन पाकिस्तान-चीन के मुकाबले करना जरूरी है। चीन के पास ड्रोन उत्पादन, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और एआई आधारित तकनीक का मजबूत आधार है। पाक चीनी तकनीक और तुर्किये की मदद से ड्रोन क्षमता बढ़ा रहा है। भारत के सामने चुनौती सिर्फ ड्रोन लेने की नहीं, बल्कि सीमा पर निगरानी, सटीक जवाबी कार्रवाई और दुश्मन के ड्रोन हमलों से सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।
सेना के खरीद प्रस्तावों में ये व्यापक सोच दिखती है। चीन की क्षमता के मुकाबले के लिए स्वदेशी निर्माण, तेज मरम्मत और कम लागत में बड़ी संख्या में ड्रोन बनाने की क्षमता भी जरूरी है। ----------------- ये खबर भी पढ़ें… भारतीय सेना को मिले 106 कामिकाजे ड्रोन: 180 किमी की रेंज, 45
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar