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अब सेंसर बताएंगे कानपुर में प्रदूषण की वजह:125 माइक्रो सेंसर से होगी निगरानी, नगर निगम ने IIT की संस्था से मिलाया हाथ

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 9 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
अब सेंसर बताएंगे कानपुर में प्रदूषण की वजह:125 माइक्रो सेंसर से होगी निगरानी, नगर निगम ने IIT की संस्था से मिलाया हाथ

कानपुर की स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में रैंकिंग गिरने के बाद नगर निगम ने शहर की हवा सुधारने की तैयारियां तेज कर दी हैं। शहर की एयर क्वालिटी की वास्तविक स्थिति और प्रदूषण के सोर्स की निगरानी के लिए नगर निगम ने आईआईटी कानपुर की ऐरावत रिसर्च फाउंडेशन (एआरएफ) के साथ एमओयू किया है। इसके तहत सरकारी भवनों, स्कूल-कॉलेज समेत शहर के अलग-अलग जगहों पर 125 माइक्रो पर्यावरण सेंसर लगाए जा रहे हैं।

इनमें से 55 सेंसर स्कूल-कॉलेज की बिल्डिंग में लगाए जा चुके हैं और इनसे मॉनिटरिंग भी शुरू हो गई है। प्रदूषण के कारणों की होगी पहचान नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने बताया कि सेंसर से मिलने वाले डाटा के आधार पर प्रदूषण के कारणों की पहचान की जाएगी और संबंधित विभाग को उसे दूर करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

वायु प्रदूषण के कारकों को दूर करने के लिए तीन चरणों में एसओपी तैयार की जा रही है। पोर्टल के जरिए समस्या की मैपिंग होगी और संबंधित विभाग को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। दूसरे विभाग को ट्रांसफर होगी जिम्मेदारी नगर आयुक्त का कहना है कि पोर्टल पर समस्या को दूर करने के लिए विभाग को दो दिन का समय मिलेगा।

अगर तय समय में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो यह दूसरे चरण में जिम्मेदार विभाग को ट्रांसफर हो जाएगी। इसमें लापरवाही बरतने वाले विभाग की जवाबदेही शासन स्तर पर तय की जाएगी। निर्माण कार्यों ने बिगाड़ी शहर की हवा नगर आयुक्त ने बताया कि शहर में लगातार चल रहे निर्माण कार्य, नियमों को ताक पर रखकर बन रही बिल्डिंगों और खराब सड़कों के कारण धूल बढ़ी है।

मेट्रो, सीवर लाइन और अन्य परियोजनाओं के लिए जगह-जगह खोदाई भी रैंकिंग पर असर डाल रही है। बारिश के दौरान वायु प्रदूषण कम होता है, लेकिन अगले दो महीनों में सेंसर से मिलने वाले आंकड़ों से प्रदूषण की वास्तविक स्थिति और इसके कारणों की सटीक जानकारी सामने आने लगेगी। एक सप्ताह के भीतर खोदाई की देनी होगी सूचना नगर आयुक्त ने बताया कि सभी विभागों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि जहां भी खोदाई करनी है, उसकी जानकारी एक सप्ताह के भीतर दें।

इसके बाद उसी स्थान पर दोबारा सड़क खोदने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सभी संबंधित विभागों को शामिल कर एक समिति भी बनाई गई है। नगर निगम का लक्ष्य है कि बेहतर समन्वय और निगरानी के जरिए कानपुर फिर देश के टॉप शहरों में शामिल हो। छह पायदान नीचे खिसका कानपुर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025-26 की रिपोर्ट में कानपुर देश में 11वें स्थान पर रहा है।

पिछली रैंकिंग के मुकाबले शहर छह पायदान नीचे खिसका है। पिछले दो सालों से कानपुर पांचवें स्थान पर बना हुआ था। इस बार रैंकिंग गिरने के पीछे शहर में चल रहे बड़े पैमाने पर निर्माण, सड़कों की खराब स्थिति और जगह-जगह हो रही खोदाई को प्रमुख वजह माना जा रहा है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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