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‘सेव इंडिया, सेव शरीया’ अभियान पर पसमांदा महाज का पलटवार:वसीम राईन बोले- पर्सनल लॉ पर कोई नया खतरा नहीं, धार्मिक नारों से बढ़ सकता है ध्रुवीकरण

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 15 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
‘सेव इंडिया, सेव शरीया’ अभियान पर पसमांदा महाज का पलटवार:वसीम राईन बोले- पर्सनल लॉ पर कोई नया खतरा नहीं, धार्मिक नारों से बढ़ सकता है ध्रुवीकरण

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड 17 सितंबर से तीन महीने का देशव्यापी ‘सेव इंडिया, सेव शरीया’ अभियान शुरू करने जा रहा है। अभियान को लेकर ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राईन ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें फिलहाल मुस्लिम पर्सनल लॉ पर कोई नया खतरा नजर नहीं आता। राईन का आरोप है कि ‘देश बचाओ, शरीयत बचाओ’ जैसे भावनात्मक और धार्मिक नारों के जरिए अभियान चलाने से समाज में धार्मिक ध्रुवीकरण बढ़ने का खतरा है। बोले- पर्सनल लॉ बोर्ड में पसमांदा की हिस्सेदारी कहां?

वसीम राईन ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के नेतृत्व और प्रतिनिधित्व पर भी सवाल खड़े किए। उनका दावा है कि बोर्ड के प्रमुख पदों पर पसमांदा मुसलमानों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, जबकि मुस्लिम समाज में पसमांदा आबादी बहुसंख्यक है। उन्होंने बोर्ड को अशराफ मुसलमानों के वर्चस्व वाला संगठन बताते हुए कहा कि पसमांदा मुसलमानों का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

शाहबानो और बाबरी मस्जिद विवाद का जिक्र राईन ने शाहबानो प्रकरण और बाबरी मस्जिद विवाद का भी उल्लेख किया। उनका आरोप है कि उस समय धार्मिक नेतृत्व के दबाव में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को पलटा था। उनके मुताबिक, उन फैसलों का प्रभाव आज भी महसूस किया जा रहा है। धार्मिक संगठनों की राजनीतिक भूमिका पर भी सवाल उन्होंने बिहार में हुई ‘देश बचाओ, दीन बचाओ’ रैली और मुस्लिम संगठनों के राजनीतिक संपर्कों पर भी सवाल उठाए।

राईन ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कुछ मुस्लिम नेताओं और रिटायर्ड अधिकारियों की आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से हुई मुलाकातों का जिक्र करते हुए धार्मिक संगठनों की राजनीतिक भूमिका पर सवाल खड़े किए। बोले- भावनात्मक मुद्दों के बजाय शिक्षा और रोजगार पर फोकस हो आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राईन ने मुस्लिम धार्मिक संगठनों से भावनात्मक मुद्दों से दूर रहने की अपील की।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम नेतृत्व को संविधान, लोकतंत्र, मताधिकार, शिक्षा और रोजगार जैसे सामाजिक मुद्दों को केंद्र में रखना चाहिए। उनके मुताबिक, समुदाय की राजनीतिक दिशा धार्मिक नारों के बजाय इन बुनियादी मुद्दों पर तय होनी चाहिए।

📡 स्रोत: NewsData.io

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