शादी से तीन दिन पहले मंगेतर की हत्या, गिरिडीह में उर्मिला पर जीजा संग साजिश रचने का आरोप
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गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले में शादी से ठीक पहले होने वाले दूल्हे की हत्या के मामले में पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, युवक की हत्या उसकी होने वाली पत्नी और उसके जीजा के कथित प्रेम संबंधों के चलते रची गई साजिश का नतीजा थी। मामले में पुलिस ने होने वाली दुल्हन और उसके जीजा को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश में झारखंड और बिहार में छापेमारी की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, गिरिडीह जिले के जमुआ थाना क्षेत्र के भिखोडीह गांव निवासी 20 वर्षीय नीरज हाजरा की शादी तय थी और कुछ ही दिनों बाद बारात निकलनी थी। नीरज राजस्थान से अपने घर लौटा था, लेकिन रास्ते में ही वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया। बाद में उसका शव बिहार के जमुई जिले के जंगल क्षेत्र से बरामद हुआ।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि नीरज की मंगेतर के अपनी बहन के पति (जीजा) सुभाष पासवान से कथित प्रेम संबंध थे। पुलिस का दावा है कि दोनों अपनी शादी को अपने रिश्ते में सबसे बड़ी बाधा मान रहे थे। इसी वजह से कथित तौर पर नीरज की हत्या की साजिश रची गई। आरोप है कि नीरज को बहाने से बुलाकर उसकी हत्या की गई और पहचान छिपाने के उद्देश्य से शव को बिहार के जंगल में फेंक दिया गया।
गिरिडीह पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) गठित कर मामले की जांच की। पुलिस ने मंगेतर और उसके जीजा को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ और जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वारदात में शामिल अन्य लोगों की तलाश जारी है।
हाल के महीनों में रिश्तों के भीतर विश्वासघात और हत्या के कई मामले सामने आए हैं। इंदौर के चर्चित सोनम रघुवंशी प्रकरण और पुणे की सिया हत्याकांड के बाद गिरिडीह की यह घटना भी चर्चा में है। हालांकि, प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग हैं और पुलिस जांच के निष्कर्ष भी अलग-अलग हो सकते हैं।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की विवेचना अभी जारी है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी।
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
हिंसा और अपराध के विकल्पों को चुनने की आवश्यकता है। घरेलू विवादों को तलाक या कानूनी रास्ते से निपटा जा सकता है, वित्तीय विवादों को अदालत में ले जाना चाहिए और गुस्से को संयम से निपटना चाहिए। हमें अपने संवेदनाओं को नियंत्रित करने और समाज को सकारात्मक दिशा देने के लिए प्रयास करना चाहिए। हमारी पीड़ित भाई-बहनों के प्रति संवेदना और सहानुभूति की आवश्यकता है।