शाह के UCC वाले बयान पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का रिएक्शन - 'नई चिंताएं...'
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साल 2029 तक एनडीए शासित राज्यों में यूसीसी लागू करने को लेकर निशाना साधा है.
बोर्ड की ओर से गुरुवार (17 सितंबर) को कहा गया कि गृह मंत्री के बयान से देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता और लोगों के मौलिक अधिकारों को लेकर नई चिंताएं खड़ी होती हैं.
बोर्ड प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा, 'केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से साल 2029 तक एनडीए शासित सभी राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने संबंधी बयान ने भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं.'
जंतर-मंतर पर धरने की परमिशन नहीं मिलने पर साधा निशाना
बोर्ड की ओर से यह भी दावा किया गया है कि उसकी ओर से चलाए जा रहे 'संविधान बचाओ, देश बचाओ' अभियान के तहत जंतर-मंतर पर प्रस्तावित धरने की परमिशन प्रोग्राम होने के एक दिन पहले रद्द कर दी गई.
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस फैसले को एकतरफा बताते हुए गलत करार दिया.
💡 पृष्ठभूमि (Background)
इस खबर में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 तक एनडीए शासित राज्यों में यूसीसी लागू करने के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया दी है। यह विषय भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता तथा नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर संभावित प्रभाव से जुड़ा है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यूसीसी के लागू होने से मुस्लिम समुदाय की व्यक्तिगत कानून व्यवस्था में बदलाव हो सकता है, जिससे धार्मिक स्वायत्तता और सामाजिक समरसता पर सवाल उठ सकते हैं। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि नागरिकों को