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शाहपुरा के धनोप माताजी शक्तिपीठ में आस्था का अनूठा संगम, फूल-पाती की परंपरा है खास पहचान

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 17 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
शाहपुरा के धनोप माताजी शक्तिपीठ में आस्था का अनूठा संगम, फूल-पाती की परंपरा है खास पहचान

शाहपुरा क्षेत्र स्थित धनोप माताजी शक्तिपीठ श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। मंदिर में प्रसाद में फूल-पाती आने की परंपरा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि माता की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्र में यहां भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर प्रन्यास की ओर से मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, वहीं मंदिर क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

शाहपुरा,17 अक्टूबर। राजस्थान के शाहपुरा क्षेत्र में स्थित धनोप माताजी शक्तिपीठ श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां माता के दरबार में प्रसाद में फूल-पाती आने की अनूठी परंपरा सदियों से श्रद्धालुओं के विश्वास से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि माता के प्रसाद में फूल-पाती आने पर भक्तों की मनोकामना पूरी होती है।

इसी आस्था के चलते वर्षभर यहां श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है, जबकि दोनों नवरात्र में लगने वाले मेले के दौरान भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। धनोप माताजी शक्तिपीठ अपनी प्राचीन परंपराओं और ऐतिहासिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, मां जगदीश्वरी राजा धुंध की कुलदेवी थीं।

मंदिर परिसर में इस मान्यता से संबंधित शिलालेख भी लगे हुए हैं, जो इस धार्मिक स्थल के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं। धनोप माताजी मंदिर में श्री अष्टभुजा, श्री अन्नपूर्णा, श्री चामुंडा, श्री बिश्वनजी और श्री कालिकाजी की पांच प्रमुख प्रतिमाएं पूर्व दिशा की ओर मुख करके विराजमान हैं। इनके सामने भैरूजी का स्थान है।

मंदिर परिसर में ओघड़नाथ, भगवान शिव-पार्वती, कार्तिकेय, गणेशजी और चौसठ जोगणियों के भी दर्शन होते हैं। इन धार्मिक स्थलों से जुड़ी परंपराएं श्रद्धालुओं की आस्था को और मजबूत करती हैं। मंदिर की सबसे खास पहचान यहां प्रसाद में फूल-पाती आने की परंपरा है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि माता के दरबार में चढ़ाए गए प्रसाद में फूल-पाती आने पर उनकी मनोकामना पूरी होती है।

मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त माता के दरबार में सवामणी की रसोई का आयोजन कर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। इसी मान्यता के चलते दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं। धनोप माताजी मंदिर में चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान मेले का आयोजन किया जाता है। इन अवसरों पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

आगामी नवरात्र मेले को लेकर मंदिर प्रन्यास की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वहीं, मंदिर क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए राज्य सरकार की ओर से भी कार्ययोजना तैयार कर उसे क्रियान्वित किया जा रहा है। आस्था, इतिहास और परंपराओं का संगम धनोप माताजी शक्तिपीठ आज भी श्रद्धालुओं के विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

प्रसाद में फूल-पाती आने की अनूठी मान्यता और नवरात्र मेले की धार्मिक परंपरा इस मंदिर को विशेष पहचान देती है। नवरात्र के दौरान यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।

बाइट-1: डॉ. रविराज सिंह, श्रद्धालु बाइट-2: भगवान सिंह, श्रद्धालु

बाइट-3: सरोज कंवर, श्रद्धालु बाइट-4: सत्येंद्र सिंह राणावत, अध्यक्ष, धनोप माताजी मंदिर प्रन्यास

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।