शैक्षिक महासंघ बोला-सरकारी स्कूलों को राजनैतिक अखाड़ा नहीं बनने देंगे:नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं; जयपुर के स्कूल में बाहरी हस्तक्षेप को गलत बताया
सरकारी स्कूलों को राजनीतिक गतिविधियों और बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त रखने की मांग दोहराते हुए अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने कहा कि स्कूलों को किसी भी कीमत पर राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। महासंघ पदाधिकारियों ने मीडिया से बातचीत की। प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ.
ऋषिन चौबीसा ने बगरू के एक सरकारी स्कूल में बाहरी लोगों के निरीक्षण के प्रयास के दौरान विवाद और कथित मारपीट की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि स्कूल से जुड़ी किसी भी शिकायत के समाधान के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासन की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
महासंघ ने स्पष्ट किया कि स्कूल में शिक्षा होगी, राजनीति नहीं। शिक्षकों को राजनीतिक दबाव या गतिविधियों का हिस्सा बनाने के प्रयास का भी संगठन ने विरोध किया।
महासंघ ने सरकार द्वारा स्कूलों में बाहरी एवं राजनीतिक हस्तक्षेप नियंत्रित करने के लिए जारी दिशा-निर्देशों का समर्थन करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य सुरक्षित, अनुशासित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना है।
बांसवाड़ा संभाग उपाध्यक्ष बलवंत बामनिया ने कहा कि स्कूल बच्चों के भविष्य निर्माण के केंद्र हैं, राजनीतिक संघर्ष के नहीं। उन्होंने बताया कि राजस्थान के करीब 10 हजार स्कूलों में ABRSM से जुड़े शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ इस दिशा में भी कार्य कर रहे हैं।
महासंघ ने ग्रामीणों, शिक्षकों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक-सामाजिक संगठनों से स्कूलों से जुड़े विवादों का समाधान शांतिपूर्ण और प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से करने की अपील की।
इस दौरान प्रदेश मीडिया प्रकोष्ठ सदस्य आशीष उपाध्याय, संभाग संगठन मंत्री दिनेश मईडा, संभाग संयुक्त मंत्री गोपाल मीणा, बांसवाड़ा जिलाध्यक्ष दिलीप पाठक, प्रतापगढ़ जिलाध्यक्ष लालूराम मीणा सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
📡 स्रोत: NewsData.io