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शेयर बाजार क्यों डूबा, निवेशकों को कितने हजार करोड़ का नुकसान हुआ?

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 24 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
शेयर बाजार क्यों डूबा, निवेशकों को कितने हजार करोड़ का नुकसान हुआ?

शेयर बाजार में गुरुवार को ऐसी बिकवाली हुई कि निवेशकों के बीच हड़कंप मच गया. आज तो देखते ही देखते लोगों को बड़ा झटका लगा है.

सेंसेक्स 1,247.71 अंक गिरकर 73,580.54 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 383.70 अंक टूटकर 23,063.10 पर आ गया.

इस गिरावट में BSE पर लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू करीब 4.33 लाख करोड़ रुपए घट गई है.

लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आखिर बाजार एक ही दिन में इतना क्यों टूट गया?

इसके पीछे सिर्फ एक वजह तो नहीं हो सकती है. आइये स्टॉक मार्केट गिरने के पीछे के कारण को समझते हैं.

सबसे बड़ी वजह क्या है?

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी रही है. ये बढ़कर करीब 5.11 फीसदी तक पहुंच गई, जो करीब 19 साल का ऊंचा स्तर है.

जब अमेरिका में सरकारी बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है तो निवेशकों को वहां कम जोखिम वाले निवेश ज्यादा सही लगने लगते हैं. ऐसे में शेयर बाजार जैसे ज्यादा जोखिम वाले एसेट से पैसा निकल सकता है.

इसका असर भारत के बाजार पर भी पड़ता है.

फेट रेट भी है वजह?

दूसरी बड़ी वजह अमेरिका में ब्याज दर बढ़ना भी हो सकती है.

अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े हालिया आंकड़ों ने यह चिंता बढ़ाई है कि महंगाई पर काबू पाने के लिए US फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकता है या आगे बढ़ा सकता है.

अगर अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं तो वहां निवेश ज्यादा हो सकता है.

इसका मतलब ये भी है कि विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय शेयर बाजार में आने वाला पैसा कम हो सकता है.

कच्चा तेल है तीसरी वजह?

बाजार के लिए तीसरी बड़ी चिंता क्रूड ऑयल है. बेंट क्रूड की कीमत फिर से 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है.

इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर देश के इंपोर्ट बिल, रुपए, महंगाई और कंपनियों की लागत

📡 स्रोत: ABP Live Vyapar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

शेयर बाजार में गुरुवार को हुई तेज गिरावट ने निवेशकों को भारी नुकसान पहुँचाया, जिससे बाजार की स्थिरता पर सवाल उठे। यह घटना आर्थिक अनिश्चितता और निवेशक विश्वास के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसी अचानक गिरावट से कंपनियों की पूंजी जुटाने की क्षमता और वित्तीय बाजार की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। आम जनता पर इसका असर दो-तरफ़ा है: निवेशकों के पोर्टफोलियो में बड़ी गिरावट से आय पर असर पड़ सकता है, जबकि कंपनियों के लिए पूंजी लागत बढ़ सकती है, जिससे रोज़मर्रा के उत्पादों और सेवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।

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