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शी चिनफिंग और शहबाज शरीफ की मौजूदगी में पीएम मोदी ने SCO बैठक में आतंकवाद पर दोहरे मापदंड छोड़ने को कहा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 2 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
शी चिनफिंग और शहबाज शरीफ की मौजूदगी में पीएम मोदी ने SCO बैठक में आतंकवाद पर दोहरे मापदंड छोड़ने को कहा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) से आतंकवाद को सरकारी नीति के एक साधन के रूप में इस्तेमाल करने वाले देशों से मुकाबला करने और इस खतरे से निपटने के लिए ‘‘दोहरा मापदंड’’ छोड़ने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और कई अन्य वैश्विक नेताओं की मौजूदगी में मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में ‘‘हम केवल कार्रवाई और प्रतिक्रिया के तरीके तक सीमित नहीं रह सकते।’’ उनका इशारा सीधे तौर पर पाकिस्तान की ओर था।

प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ के भीतर निर्णायक कार्रवाई का आह्वान करते हुए आतंकवादी तंत्र -- जिसमें वित्तपोषण नेटवर्क, भर्ती के तरीके और पनाहगाह शामिल हैं -- को पूरी तरह से खत्म करने की वकालत की।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जो देश आतंकवाद का इस्तेमाल नीतिगत हथियार के तौर पर करते हैं, उन्हें चेतावनी दी जानी चाहिए कि आतंकवाद कभी भी किसी के लिए ‘‘रणनीतिक रूप से उपयोगी’’ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि आतंकवादी गतिविधियां मानवता के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई हैं।

मोदी ने पश्चिम एशिया संकट पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत लगातार यह कहता रहा है कि सभी तनावों और संघर्षों का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के संदर्भ में कहा कि कनेक्टिविटी परियोजनाओं को सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए क्योंकि यह एससीओ चार्टर की मूल भावना है।

भारत बीआरआई का विरोध करता रहा है क्योंकि इसका कुछ हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरता है। इसे भी पढ़ें: आतंकवाद पर दोहरे मापदंड के खिलाफ SCO का बिश्केक घोषणापत्र जारी, सीमा पार आतंक पर सख्त रुख प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘आतंकवाद पूरी मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है।

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हम सिर्फ कार्रवाई-प्रतिक्रिया वाले नजरिए तक सीमित नहीं रह सकते।’’ मोदी ने कहा, ‘‘हमें आतंकवाद के वित्त पोषण, आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ के प्रसार और आतंकियों के पनाहगाहों के पूरे तंत्र को खत्म करना होगा।

हमें एक स्वर में बात करनी होगी और यह स्पष्ट करना होगा कि इस गंभीर मुद्दे पर दोहरे मापदंडों की कोई जगह नहीं हो सकती।’’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमें उन देशों को कड़ा संदेश देना चाहिए जो आतंकवाद का इस्तेमाल अपनी नीति के तौर पर करते हैं तथा आतंकवादियों को पनाह और समर्थन देते हैं।

आतंकवाद कभी भी किसी के लिए रणनीतिक रूप से उपयोगी नहीं हो सकता।’’ मोदी ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि एक क्षेत्र का संघर्ष केवल उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। उन्होंने कहा, ‘‘आज की आपस में जुड़ी हुई दुनिया में, सुरक्षा का दायरा और भी बढ़ गया है।

पश्चिम एशिया के संकट ने यह दिखा दिया है कि किसी एक इलाके का टकराव सिर्फ उसी इलाके तक सीमित नहीं रहता। इसे भी पढ़ें: बिश्केक में शी चिनफिंग ने एससीओ देशों से आतंकवाद और अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई का किया आह्वान इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है जिससे ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती हैं।

ऐसी रुकावटों का सबसे ज़्यादा असर ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए भारत लगातार यह कहता रहा है कि सभी तनावों और संघर्षों का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए।’’ प्रधानमंत्री ने शांतिपूर्ण यूरेशिया के लिए शांति और स्थिरता के महत्व पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘एक शांतिपूर्ण और सुरक्षित यूरेशिया के लिए हमारी साझा इच्छा, अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से भी गहराई से जुड़ी है।

भारत, अफगानिस्तान के लोगों के विकास और उन्हें मानवीय सहायता पहुंचाने में योगदान देता रहा है और आगे भी ऐसा करता रहेगा।’’ मोदी ने संपर्क व्यवस्था सुधारने के महत्व को भी रेखांकित किया और कहा कि भारत बाजारों को जोड़ने, व्यापार को बढ़ावा देने और विकास के नए रास्ते खोलने वाले सभी प्रयासों का समर्थन करता है।

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, यह भी जरूरी है कि ऐसे प्रयास सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें। यह एससीओ चार्टर की मूल भावना भी है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आने वाले समय में संपर्क व्यवस्था का दायरा और व्यापक होगा।

सड़कों, रेलवे और हवाई गलियारों के साथ-साथ हमें सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाना होगा, डिजिटल दस्तावेजों को बढ़ावा देना होगा और साजोसामान नेटवर्क को अधिक प्रभावी बनाना होगा।’’ प्रधानमंत्री मोदी का भाषण तीन मुख्य विषयों - सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर - पर आधारित था, जिनका प्रस्ताव उन्होंने समूह के पिछले शिखर सम्मेलन में एससीओ के लिए भारत की दृष्टि के तौर पर दिया था।

उन्होंने कहा, ‘‘अब समय आ गया है कि इन तीनों स्तंभों को केवल दृष्टिकोण तक सीमित न रखते हुए ठोस परिणामों में बदला जाए। इसके लिए सबसे पहली और जरूरी आवश्यकता शांति व सुरक्षा है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि एससीओ सहयोग का लाभ सीधे तौर पर लोगों तक पहुंचना चाहिए।

इसे भी पढ़ें: ताशकंद में पीएम मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव की वार्ता, रक्षा व व्यापार में साझेदारी बढ़ाने पर बनी सहमति उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारे लोगों के बीच संबंध हैं। भारत के लिए एससीओ महान सभ्यताओं, संस्कृतियों और विचारों का संगम है।

एससीओ के अगले 25 वर्षों में लोगों के बीच संबंध हमारे सहयोग का केंद्रबिंदु रहना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सफलता का सही पैमाना यह होना चाहिए कि हमारे प्रयासों से युवाओं के लिए कितने नए अवसर पैदा होते हैं, उद्यमियों के लिए कितने नए बाजार खुलते हैं, किसानों को तकनीक से कितना लाभ मिलता है और नागरिकों का जीवन कितना बेहतर होता है।’’ एससीओ शिखर सम्मेलन में संगठन के 25 वर्ष पूरे होने पर हुई प्रगति की समीक्षा की गई और क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, स्थिरता व समृद्धि के लिए इसकी भूमिका को और बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की गई।

मोदी ने कहा कि यह वर्षगांठ अगले 25 वर्षों के लिए रोडमैप तैयार करने का उचित अवसर है। शिखर सम्मेलन में चार सहमति पत्रों और 20 से अधिक फैसलों एवं वक्तव्यों को मंजूरी दी गई, जिनमें जलवायु, परमाणु सुरक्षा, ऊर्जा संरक्षण और नशीली दवाओं की रोकथाम जैसे विषय शामिल हैं।

📡 स्रोत: NewsData.io

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