शिक्षा व्यवस्था में नैतिक मूल्यों और भावनात्मक विकास पर मंथन, टीचर्स डे समारोह में विशेषज्ञों ने रखे विचार
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भोपाल। जमात-ए-इस्लामी हिंद (JIH) महिला विभाग की ओर से 6 सितंबर को मेजबान बैंक्विट हॉल में शिक्षक दिवस समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने सहभागिता की।
इस अवसर पर “व्हाट मिसिंग इन एजुकेशन सिस्टम” विषय पर पैनल डिस्कशन आयोजित किया गया, जिसमें शिक्षकों, व्याख्याताओं, प्रोफेसरों, बुद्धिजीवियों और स्कूल प्राचार्यों ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों और सुधार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। पैनल चर्चा का संचालन रफिया सुल्तान ने किया।
चर्चा के दौरान रचना चौबे ने कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली में नैतिक और सामाजिक मूल्यों के विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उनका मानना था कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में नैतिकता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
शिक्षाविद सबीना जमशेद ने मातृभाषा आधारित पारिवारिक शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा घर से मजबूत होनी चाहिए। उन्होंने विद्यालयों में भाषा शिक्षण को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता भी बताई।
शिक्षाविद नीलिमा ने कहा कि शिक्षा को रोजमर्रा के जीवन और वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थी व्यावहारिक जीवन की चुनौतियों का बेहतर सामना कर सकें।
शिक्षाविद हिमशिखा ने बच्चों के भावनात्मक विकास को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाना आवश्यक है। शिक्षाविद मारिया ने शिक्षा के मूल उद्देश्य और मानवीय संवेदनाओं के विकास पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
शिक्षाविद योगिता यश रावत ने कहा कि शिक्षा की आत्मा को सुरक्षित रखते हुए बच्चों को बचपन से ही अनावश्यक व्यावसायिक और राजनीतिक प्रभावों से दूर रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चे को अज्ञात से ज्ञात की ओर ले जाना और उसके स्वाभाविक व्यक्तित्व का विकास करना है।
कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने शिक्षक की भूमिका को विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण का आधार बताते हुए अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। चर्चा में शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और भावनात्मक विकास को जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
अंत में JIH महिला विंग, शहर भोपाल की जिम्मेदार फरहा नाज़ के अध्यक्षीय संबोधन और सम्मान समारोह के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। प्रतिभागियों ने जमात-ए-इस्लामी हिंद महिला विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे संवादात्मक और ज्ञानवर्धक आयोजनों की आवश्यकता जताई।