शिमला जिला में प्रवासी श्रमिकों के रोजगार एवं स्वरोजगार से पूर्व सत्यापन अनिवार्य
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अक्तूबर 3, शिमला (हिमाचल प्रदेश): जिला दंडाधिकारी शिमला अनुपम कश्यप ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता/भारतीय न्याय संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत शिमला जिला में आने वाले प्रवासी श्रमिकों के संबंध में आवश्यक आदेश जारी किए हैं। आदेश का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
आदेश के अनुसार शिमला जिला में आने वाले किसी भी प्रवासी श्रमिक को नियोक्ता, ठेकेदार अथवा व्यापारी द्वारा गैर-औपचारिक कार्य, सेवा अथवा ठेका श्रम में तब तक नियोजित नहीं किया जाएगा, जब तक उसके व्यक्तिगत विवरण, पासपोर्ट साइज फोटो आदि संबंधित थाना प्रभारी को उपलब्ध करवाकर पहचान एवं पूर्ववृत्त का सत्यापन नहीं करवा लिया जाता।
इसी प्रकार, शिमला जिला में आने वाला कोई भी व्यक्ति गैर-औपचारिक व्यवसाय अथवा स्वरोजगार शुरू करने या रोजगार प्राप्त करने से पहले संबंधित थाना प्रभारी को इसकी सूचना देगा तथा जिस क्षेत्र में वह कार्य अथवा स्वरोजगार करना चाहता है, वहां संबंधित पुलिस थाना को अपने उद्देश्य से अवगत करवाना अनिवार्य होगा।
जिला दंडाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले प्रवासी श्रमिकों तथा उनके नियोक्ताओं के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। आदेश की तात्कालिक आवश्यकता को देखते हुए इसे 01 अक्तूबर 2026 से लागू किया गया है तथा यह 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।
आदेश का उल्लंघन कानून के अनुसार दंडनीय होगा।
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
शिमला में प्रवासी श्रमिकों के लिए सत्यापन अनिवार्य करने से न केवल कानूनी व्यवस्था बनी रहती है, बल्कि सभी के लिए सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित होता है। यह कदम दिखाता है कि जब हम पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता देते हैं, तो हम शोषण और दुर्घटनाओं को रोक सकते हैं। हर श्रमिक को समान अधिकार और सम्मान का अधिकार है; चलिए हम सभी मिलकर एक न्यायसंगत और सुरक्षित समाज का निर्माण करें, जहाँ हर किसी का योगदान सराहा जाए।