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शिवपुरी में उल्टा न्याय: अवैध शराब बेच रहा ठेकेदार, जेल जा रहा है गरीब - अमोलपठा-कुटवारा में खाकी पर गंभीर आरोप

लेखक: Ranu Parihar अंतिम अपडेट: 13 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
शिवपुरी में उल्टा न्याय: अवैध शराब बेच रहा ठेकेदार, जेल जा रहा है गरीब - अमोलपठा-कुटवारा में खाकी पर गंभीर आरोप

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शिवपुरी जिले में कानून-व्यवस्था और आबकारी नियमों को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। आरोप बेहद संगीन है - पुलिस और शराब ठेकेदारों की कथित मिलीभगत से एक लाइसेंसी दुकान की आड़ में पूरे इलाके में अवैध शराब का कारोबार चल रहा है और जब गरीब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो उन्हें ही अपराधी बनाकर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया। यह मामला थाना इंदार के ग्राम अमोलपठा और कुटवारा का है, जो अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार शासन द्वारा नियमानुसार एक स्थान के लिए शराब की लाइसेंसी दुकान का ठेका दिया जाता है। नियम स्पष्ट है कि शराब की बिक्री केवल उसी निर्धारित लाइसेंसी दुकान से ही होगी। लेकिन शिवपुरी जिले के ग्रामीण अंचलों में हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कुटवारा में स्थित लाइसेंसी दुकान के नाम पर ठेका लेकर ठेकेदार द्वारा अमोलपठा सहित आसपास के 10 से 12 स्थानों पर अवैध रूप से शराब बेची जा रही है। ये अवैध ठिकाने किराना दुकानों, ढाबों, सुनसान खेतों और गांव के बाहर बनी टपरियों में चल रहे हैं। जहां न केवल शराब बेची जा रही है बल्कि वहीं पर अवैध अहाते बनाकर खुलेआम शराब पिलाई भी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सब पुलिस और आबकारी विभाग की आंखों के सामने हो रहा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

कैसे बिगड़ रहा है गांव का माहौल?

ग्रामीणों का दर्द यह है कि इस अंधाधुंध अवैध बिक्री के कारण गांव का सामाजिक ताना-बाना पूरी तरह बिगड़ गया है। सुबह से शाम तक इन अवैध अहातों पर शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है। गाली-गलौज, मारपीट रोज की बात हो गई है।

एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "पहले लोग दुकान पर जाकर शराब लाते थे, अब तो हर गली में शराब मिल रही है। हमारे छोटे-छोटे बच्चे देख रहे हैं, बिगड़ रहे हैं। शाम होते ही घर में झगड़े शुरू हो जाते हैं। घरेलू हिंसा बढ़ गई है। हमने कई बार ठेकेदार के लोगों से कहा कि गांव के अंदर मत बेचो, लेकिन वे धमकाते हैं कि हमारी पुलिस से सेटिंग है।"

महिलाओं में इसको लेकर सबसे ज्यादा आक्रोश है। महिलाओं का कहना है कि उनके पति दिन भर की मजदूरी का पैसा इन अवैध ठिकानों पर उड़ा देते हैं, जिसके बाद घर में खाने तक के लाले पड़ जाते हैं।

विरोध किया तो उल्टा गरीबों पर ही केस?

इस अवैध कारोबार से परेशान होकर जब अमोलपठा और कुटवारा के कुछ ग्रामीणों और युवाओं ने एकजुट होकर विरोध जताया तो कहानी ने दूसरा मोड़ ले लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि विरोध को दबाने के लिए शराब ठेकेदार और पुलिस ने मिलकर एक सोची-समझी साजिश रची।

ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार के इशारे पर पुलिस ने विरोध करने वाले गरीब मजदूरों, युवकों को ही आरोपी बना दिया।

दूसरी तरफ पुलिस का आधिकारिक पक्ष अलग है। थाना इंदार पुलिस के अनुसार ग्राम कुटवारा की लायसेंसी शराब दुकान में घुसकर तोड़फोड़, नुकसान पहुंचाने और अमोलपठा में कार्रवाई करने गई पुलिस-आबकारी टीम पर हमला करने के मामले में अपराध क्रमांक 157/26 दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में आरोपियों को चिन्हित कर सरपंच व दो महिलाओं सहित 15 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है और शेष आरोपियों की तलाश जारी है।

लेकिन ग्रामीण इस पुलिस कार्रवाई को पूरी तरह फर्जी और बदले की भावना से की गई कार्रवाई बता रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि "हमने कोई तोड़फोड़ या आगजनी नहीं की। हमने सिर्फ अवैध शराब बिक्री का विरोध किया था। पुलिस ने ठेकेदार को बचाने के लिए हम पर ही झूठा मुकदमा लाद दिया। जो पुलिस अवैध बेचने वालों पर कार्रवाई नहीं कर रही, वही हमें शांति भंग, मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा जैसी गंभीर धाराओं में जेल भेज रही है।"

क्या कहता है आबकारी कानून?

मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम के अनुसार यह पूरी तरह अवैध है।

लाइसेंसी दुकान के अलावा किसी अन्य स्थान पर शराब बेचना गंभीर अपराध है।

लाइसेंसी दुकान के 100 मीटर के दायरे में शराब पीने के लिए अहाता बनाना या सार्वजनिक स्थान पर शराब पिलाना प्रतिबंधित है।

एक लाइसेंस पर केवल एक ही दुकान संचालित की जा सकती है, उसकी आड़ में गांव-गांव ठिकाने नहीं खोले जा सकते।

यदि ऐसा होता है तो लाइसेंस निरस्त करने और ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान है।

सवाल यह उठता है कि जब नियम इतने स्पष्ट हैं तो फिर 10 जगह शराब कैसे बिक रही है? और आबकारी विभाग मौन क्यों है?

बड़े सवाल जो जवाब मांग रहे हैं

इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पहला सवाल - क्या वाकई में एक लाइसेंस की आड़ में 10 जगह शराब बेची जा रही है? अगर हां, तो आबकारी विभाग के अधिकारी क्या कर रहे थे?

दूसरा सवाल - जब ग्रामीणों ने विरोध किया तो उनकी शिकायत पर अवैध ठिकानों पर कार्रवाई करने की बजाय विरोध करने वालों को ही जेल क्यों भेजा गया?

तीसरा सवाल - क्या अमोलपठा और कुटवारा में हुई तोड़फोड़ की घटना ग्रामीणों के गुस्से का परिणाम थी या फिर अवैध बिक्री को जारी रखने के लिए पुलिस-ठेकेदार की मिलीभगत से रची गई पटकथा?

चौथा सवाल - जिन 15 लोगों को जेल भेजा गया है, उनमें गरीब मजदूर और महिलाएं हैं, क्या वे वाकई अपराधी हैं या फिर सिस्टम की लापरवाही के शिकार गरीब लोग?

निष्पक्ष जांच की मांग

फिलहाल इस घटना के बाद दोनों गांवों में तनाव और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक शिवपुरी से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए। मौके पर जाकर देखा जाए कि कितनी जगह अवैध शराब बिक रही है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अवैध बिक्री बंद नहीं की गई और झूठे मामलों में फंसाए गए गरीब लोगों को न्याय नहीं मिला तो वे जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

इस संबंध में जब पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों से पक्ष जानने की कोशिश की गई तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। आबकारी अधिकारी भी इस मामले में कुछ भी कहने से बचते नजर आए।

बहरहाल, यह मामला केवल शराब की अवैध बिक्री का नहीं, बल्कि गरीब की आवाज को दबाने और सिस्टम पर उठ रहे भरोसे के संकट का है। देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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Ranu Parihar

रानू परिहार शिवपुरी के वरिष्ठ पत्रकार हैं, जो लंबे समय से जनसमस्याओं और सामाजिक मुद्दों को अपनी पत्रकारिता के माध्यम से सामने लाते हैं। वे जमीनी स्तर की खबरों और जनसरोकार से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाते हैं।