आज का श्लोक : दुह्यन्ति ये स्वराष्ट्राय कामयन्ते च मङ्गलम्।

यह श्लोक राष्ट्रभक्ति, नागरिक कर्तव्य और राष्ट्रद्रोही प्रवृत्तियों के दुष्परिणामों को रेखांकित करने वाला एक अत्यंत प्रभावशाली नैतिक संदेश देता है। श्लोक- दुह्यन्ति ये स्वराष्ट्राय कामयन्ते च मङ्गलम्।
पोतच्छिदो विनश्यन्ति यथा सिन्धुं तितीर्षवः॥ श्लोक का भावार्थ: अपने राष्ट्र के साथ तो द्रोह करते हैं, पर चाहते हैं हमारा मङ्गल हो, वे पुरुष समुद्र के पार [...]
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