आज का श्लोक : विपत्सु वज्रधैर्याणां संग्रामे वज्रदेहिनाम्

यह श्लोक प्राचीन काल की युद्ध-नीति से आगे बढ़कर आज के आधुनिक समाज और राष्ट्र के लिए तीन मुख्य कारणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है- श्लोक- विपत्सु वज्रधैर्याणां संग्रामे वज्रदेहिनाम्।
संघो राष्ट्रविपत्काले सद्वजकवचायते॥ भावार्थ- विपत्ति के समय पराकाष्ठा का धैर्य रखने वाले को संग्राम के अवसर पर वज्र के सदृश दृढ़ देह वाले को और राष्ट्र [...]
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