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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आज:पूजा-पाठ के साथ ही व्रत-उपवास करने की परंपरा, व्रत की वजह से पूजा-पाठ में बनी रहती है एकाग्रता

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 4 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आज:पूजा-पाठ के साथ ही व्रत-उपवास करने की परंपरा, व्रत की वजह से पूजा-पाठ में बनी रहती है एकाग्रता

आज (4 सितंबर) श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है। भगवान श्रीकृष्ण के प्रकट उत्सव पर पूजा-पाठ के साथ ही व्रत रखने की परंपरा भी है। भक्त पूरे दिन अन्न का सेवन नहीं करते। कुछ लोग पूरे दिन निराहार रहते हैं, कुछ लोग एक समय फलाहार करके व्रत रखते हैं। योग और आयुर्वेद में भी उपवास को शरीर और मन के लिए लाभदायक माना गया है।

मान्यता: भक्ति में एकाग्रता बनाए रखने में मदद करता है व्रत उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण की पूजा, मंत्र जप और भक्ति के साथ ही व्रत करने की परंपरा है। व्रत में अन्न का त्याग किया जाता है। इस के पीछे एक कारण शरीर को हल्का रखना भी माना जाता है।

खाना खाने के बाद शरीर की ऊर्जा का एक हिस्सा पाचन प्रक्रिया में लग जाता है और अधिक भोजन करने पर सुस्ती महसूस हो सकती है। जन्माष्टमी के दिन अगर भारी भोजन किया जाए, तो आलस या अपच के कारण पूजा-पाठ और मंत्र जप में मन लगाना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से भी भक्त अन्न का त्याग करते हैं।

फलाहार को भोजन का एक विकल्प माना जाता है। फल अपेक्षाकृत हल्के होते हैं और उनसे शरीर को जरूरी ऊर्जा भी मिलती है। इससे मन में सकारात्मकता और पवित्र विचार बनाए रखने में मदद मिलती है। भूख पर नियंत्रण होने से भक्त पूजा, तप और मंत्र जाप में अधिक एकाग्रता के साथ समय दे पाते हैं।

व्रत-उपवास से पाचन तंत्र को मिलता है आराम उज्जैन के आयुर्वेदिक कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर डॉ. राम अरोरा के मुताबिक, आयुर्वेद के प्रमुख ग्रंथ चरक संहिता के सूत्रस्थान अध्याय में लंघन यानी शरीर को हल्का करने वाली चिकित्सा का उल्लेख मिलता है।

आयुर्वेद में उपचार के छह प्रमुख तरीके बताए गए हैं- लंघन, बृंहण, रूक्षण, स्नेहन, स्वेदन और स्तंभन। इनमें लंघन का विशेष महत्व है। इसका उद्देश्य शरीर को हल्कापन प्रदान करना है।

आयुर्वेद में लंघन के 10 प्रकार बताए गए हैं, जिनमें वमन, विरेचन, शिरोविरेचन, निरूढ़ वस्ति, पिपासा, वायु सेवन, धूप सेवन, पाचन औषधियों का सेवन, उपवास और व्यायाम शामिल हैं। इनमें उपवास को भी लंघन बताया गया है। आयुर्वेदिक नजरिए से उपवास पाचन प्रक्रिया को बेहतर रखने और कफ-पित्त को संतुलित करने में मदद करता है।

गैस, अपच, डकार और जी मिचलाने जैसी पाचन संबंधी परेशानियों में भी व्रत-उपवास से लाभ हो सकता है। एक दिन अन्न से दूरी बनाने पर पाचन तंत्र को कुछ समय के लिए आराम मिल सकता है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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