श्रीराम के आदर्शों से गूंजा कथा पंडाल, उमड़े श्रद्धालु, मर्यादा पुरुषोत्तम के जीवन प्रसंगों ने दिया संस्कार और कर्तव्य का संदेश
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भोपाल, 8 अक्टूबर। ध्यान विज्ञान परमार्थ संस्थान द्वारा आयोजित पितृमोक्ष श्रीराम कथा महोत्सव के सातवें दिवस वायु प्राइड रेजिडेंसी, रक्षा विहार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण करने पहुंचे। कथा व्यास आचार्य मनोज अवस्थी महाराज ने भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए धर्म, मर्यादा, त्याग और कर्तव्य का संदेश दिया।
आचार्य मनोज अवस्थी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, संयम और आदर्शों की प्रेरणा देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने और अपने संस्कारों एवं मर्यादाओं का पालन करने का आह्वान किया।
कथा से मिला संस्कार और सेवा का संदेश
महाराज ने कहा कि परिवार में प्रेम, बड़ों का सम्मान और समाज के प्रति सेवा भाव भारतीय संस्कृति की पहचान है। भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाकर व्यक्ति परिवार और समाज को बेहतर दिशा दे सकता है।
आयोजन के मुख्य आयोजक फ्लाइंग योगी राम मनोहर सिंह सेंगर, संस्थापक ध्यान विज्ञान परमार्थ संस्थान एवं चेयरमैन वायु बिल्डकॉन ग्रुप ऑफ कंपनीज ने कहा कि श्रीराम कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म के साथ संस्कार, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश मिल रहा है।
कथा के दौरान भगवान श्रीराम के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। आयोजन में समिति के पदाधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
श्रीराम के आदर्शों को स्मरण करते हुए पितृमोक्ष श्रीराम कथा महोत्सव के सातवें दिन वायु प्राइड रेजिडेंसी, रक्षा विहार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए। यह कार्यक्रम भगवान श्रीराम के जीवन के प्रसंगों को व्यास आचार्य मनोज अवस्थी महाराज द्वारा भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत कर धर्म, मर्यादा, त्याग और कर्तव्य के मूल्यों को पुनः जागृत करता है। इस प्रकार की सांस्कृतिक कार्यक्रमों की महत्ता यह है कि वे समाज में नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना का माध्यम बनते हैं। आम जनता पर इसका असर सकारात्मक होता है, क्यो