सीजेपी नेताओं की रिहाई के बाद ऐलान—‘लड़ाई तो अभी शुरू हुई है’
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सीजेपी नेताओं की रिहाई के बाद ऐलान—‘लड़ाई तो अभी शुरू हुई है’ सौरव दास और आशुतोष रांका ने पुलिस पर लगाए अमानवीय व्यवहार के आरोप, अभिजीत दिपके समेत तीनों नेता एहतियाती हिरासत से रिहा नई दिल्ली, 11 अक्टूबर। दिल्ली में विरोध प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके समेत तीन प्रमुख नेताओं को रविवार सुबह रिहा कर दिया गया।
रिहाई के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाह रहे लोगों को हिरासत में लिया गया और पुलिस का अमानवीय चेहरा देखने को मिला। नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। ‘72 घंटे में आपातकाल जैसा माहौल देखा’ आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि उन्हें विमान से ही हिरासत में ले लिया गया।
उन्होंने कहा कि पिछले 72 घंटों के घटनाक्रम ने उन्हें आपातकाल की याद दिला दी। उनके मुताबिक, विरोध प्रदर्शन करना चाह रहे हजारों लोगों को पकड़ा गया और यातायात सेवाओं पर भी पाबंदियां लगाई गईं। रांका ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि आयोग भाजपा के पक्ष में काम कर रहा है।
ये आरोप सीजेपी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगाए हैं। दादी के निधन को लेकर भी पुलिस पर आरोप सीजेपी नेताओं ने बताया कि अभिजीत दिपके की दादी का निधन हो गया था। उनका आरोप है कि दिपके को इसकी जानकारी दिए जाने के दौरान भी पुलिस ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई। आशुतोष रांका ने यह भी आरोप लगाया कि दिपके को अपने भाई से बात करने की अनुमति नहीं दी गई।
रांका के अनुसार, दिपके अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने गया। 24 घंटे से अधिक हिरासत में रहे नेता रिपोर्ट के अनुसार, अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को 10 अक्टूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत एहतियाती हिरासत में लिया गया था। रविवार सुबह दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन से कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश पर उन्हें रिहा किया गया।
दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में कहा कि तीनों नेताओं के खिलाफ निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया और उन्हें 11 अक्टूबर को दिल्ली कैंट स्थित कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। रिहाई के बाद सीजेपी नेताओं ने आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि विरोध का उद्देश्य अपने मुद्दों को उठाना है और वे आगे भी अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
📡 स्रोत: NewsData.io
💡 पृष्ठभूमि (Background)
सीजेपी के प्रमुख नेताओं की एहतियाती हिरासत से रिहाई के बाद, सौरव दास और आशुतोष रांका ने पुलिस पर अमानवीय व्यवहार के आरोप लगाते हुए "लड़ाई अभी शुरू हुई है" का ऐलान किया। यह घटना दिल्ली में राजनीतिक असंतोष के बीच एक नई दहलीज़ पर पहुँचने का संकेत देती है। इसकी महत्ता इस बात में है कि यह दिखाता है कि सरकार के खिलाफ विरोध की आवाज़ें बढ़ रही हैं और नागरिकों के अधिकारों पर प्रश्न उठ रहे हैं। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि पुलिस और सरकार के प्रति अविश्वास बढ़े, जिससे सामाजिक तनाव और अस्थिरता का खत