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सीकर में सातवें शेखावाटी साहित्य संगम का शुभारंभ, राज्यपाल बोले-साहित्य समाज को दिशा देने वाला प्रकाश स्तंभ

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 9 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
सीकर में सातवें शेखावाटी साहित्य संगम का शुभारंभ, राज्यपाल बोले-साहित्य समाज को दिशा देने वाला प्रकाश स्तंभ

तीन दिवसीय साहित्यिक महाकुंभ में राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर, पुस्तक मेला, कवि सम्मेलन और लोक संस्कृति से जुड़े आयोजन होंगे आकर्षण

सीकर, 9 अक्टूबर। शेखावाटी की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने के उद्देश्य से शुक्रवार को सीकर में सातवें शेखावाटी साहित्य संगम का शुभारंभ हुआ। सालासर रोड स्थित गोविंदम रिसॉर्ट एवं मैरिज गार्डन में आयोजित समारोह में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने दीप प्रज्ज्वलित कर तीन दिवसीय साहित्यिक आयोजन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने शेखावाटी की वीरता, त्याग, तपस्या, उद्यमिता और सांस्कृतिक चेतना की सराहना करते हुए साहित्य को समाज का मार्गदर्शक बताया।

राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि साहित्य केवल समाज का प्रतिबिंब नहीं, बल्कि उसे सही दिशा दिखाने वाला प्रकाश स्तंभ भी है। साहित्य समय की धड़कनों को पहचानता है, समाज की पीड़ा को स्वर देता है और लोगों की आकांक्षाओं को अभिव्यक्ति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि लेखन और अभिव्यक्ति में मर्यादा एवं संयम बनाए रखना जरूरी है। ऐसा साहित्य लिखा जाना चाहिए, जो समाज के हित में हो और राष्ट्रहित को बढ़ावा दे। किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना लेखन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

राज्यपाल ने शेखावाटी की ऐतिहासिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र अपनी भव्य हवेलियों और जीवंत भित्ति चित्रों के साथ देश की रक्षा के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों की भूमि के रूप में भी जाना जाता है। यहां अनेक परिवारों की कई पीढ़ियों ने सेना में सेवाएं देकर राष्ट्र की सुरक्षा में योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि शेखावाटी की धरती त्याग, तपस्या, शौर्य और स्वाभिमान की गौरवशाली परंपरा की प्रतीक है। जब साहित्य राष्ट्रबोध और सामाजिक समरसता को मजबूत करता है, तो समाज में एकता, कर्तव्यनिष्ठा और स्वाभिमान की भावना विकसित होती है।

राज्यपाल ने साहित्य संगम में शामिल विद्यार्थियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को लेखन, कविता और रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित करते हैं। साहित्यकारों और कवियों को सुनने से विद्यार्थियों को नए विचारों से परिचित होने तथा अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर मिलता है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन काल में वेदों और ज्ञान की विरासत को मौखिक परंपरा के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाया जाता था। लोक साहित्य, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण आज भी आवश्यक है, ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ी रह सके।

शेखावाटी साहित्य संगम एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम 9 से 11 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें साहित्य, इतिहास, संस्कृति और समकालीन सामाजिक विषयों पर विभिन्न सत्रों में विमर्श होगा, जिसमें साहित्यकार और विषय विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे।

आयोजन स्थल पर पुस्तक मेले में विभिन्न प्रतिष्ठित प्रकाशनों की पुस्तकें उपलब्ध रहेंगी। इसके साथ ही कवि सम्मेलन, साफा-पगड़ी बांधने, मेहंदी, प्रश्नोत्तरी, एकल एवं सामूहिक लोकगीत, लोकनृत्य, चित्रकला और पोस्टर निर्माण जैसी प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों के माध्यम से शेखावाटी की लोकसंस्कृति, पारंपरिक कलाओं और युवाओं की रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान किया जाएगा।

कार्यक्रम में पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. युद्धवीर सिंह, सेंटर फॉर इलेक्ट्रॉनिक गवर्नेंस के निदेशक डॉ. अविनाश पंवार, कार्यक्रम संयोजक डॉ. नेकीराम आर्य और सचिन शर्मा, साहित्य प्रेमी डॉ. बी.एल. रणवा, स्टॉल संचालक अपूर्वा सहित साहित्यकार, शिक्षाविद्, विद्यार्थी और स्थानीय गणमान्यजन मौजूद रहे।

बाइट : हरिभाऊ बागड़े, राज्यपाल, राजस्थान।

बाइट : प्रो. डॉ. युद्धवीर सिंह, कुलगुरु, पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय।

बाइट : डॉ. अविनाश पंवार, निदेशक, सेंटर फॉर इलेक्ट्रॉनिक गवर्नेंस।

बाइट : डॉ. नेकीराम आर्य, कार्यक्रम संयोजक।

बाइट : डॉ. बी.एल. रणवा, साहित्य प्रेमी।

बाइट : सचिन शर्मा, कार्यक्रम संयोजक।

बाइट : अपूर्वा, स्टॉल संचालक।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।