SIR पर बढ़ा बवाल! ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर SC में सुनवाई आज
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
SIR विवाद के बाद से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग हो रही है. ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में प्रोटेस्ट हो रहा है.
आज सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई होगी.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी मोहना की पीठ राकेश कुमार सिंह और वकील शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने वाली है.
इस याचिका पर होगी सुनवाई
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सीईसी के निलंबन की मांग के अलावा, याचिकाओं में यह भी चुनौती दी गई है कि उन्होंने कथित तौर पर दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की सहमति के बिना ज्ञानेश कुमार के लिए गए फैसले, दिशानिर्देश और सॉफ्टवेयर परिवर्तन किए हैं.
याचिका में क्या लिखा है
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, पटना के निवासी राकेश कुमार सिंह की दायर जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह निर्धारित करने का आग्रह किया गया है कि क्या सीईसी कुमार व्यक्तिगत रूप से उन शक्तियों का प्रयोग कर रहे हैं जो कानूनी तौर पर पूरे चुनाव निकाय से संबंधित हैं और यदि ऐसा पाया जाता है, तो इन निर्णयों को अनधिकृत घोषित किया जाए और उचित कानूनी कार्रवाई की जाए.
याचिका में टॉप कोर्ट से यह निर्देश देने का आग्रह किया गया है कि सीईसी वर्तमान याचिका की अंतिम सुनवाई तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यों का प्रयोग नहीं करेंगे और पद की रिक्ति की अवधि के दौरान, ईसीआई का कामकाज दो चुनाव आयुक्तों के सर्वसम्मत निर्णय से किया जाएगा.
कब शुरू हुआ विवाद एसआईआर को लेकर विवाद द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में खुलासे के बाद हुआ है.
इस रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के नाम पर लिए गए फैसलों पर आपत्ति
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के चलते SIR विवाद ने देशभर में प्रोटेस्ट पैदा किया है। यह विषय चुनाव आयोग की पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रियाओं पर सवाल उठाता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि SC में सुनवाई से निलंबन का निर्णय लोकतंत्र के मूल स्तम्भों को प्रभावित कर सकता है। यदि निलंबन या इस्तीफा स्वीकार किया जाता है तो चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर असर पड़ेगा, जिससे मतदाताओं का विश्वास कम हो सकता है। आम जनता पर इसका प्रभाव चुनावी प्रक्रिया में अनिश्चितता और राजनीतिक ध्रुवीकरण को